परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय ने डिजिटल लॉकर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सितंबर 2019 तक मंत्रालय की ओर से यह सुविधा विश्वविद्यालय को पूरी तरह नि:शुल्क दी जा रही है। जल्द ही सीडीएसएल की टीम विश्वविद्यालय आएगी और इससे जुड़ी तकनीकी जानकारी देगी। इसके बाद हम विद्यार्थियों का अकाउंट खोलेंगे और उनके डाक्यूमेंट डिजिटल लॉकर में रखेंगे।
दिसंबर सेमेस्टर परिणाम के बाद पहले व दूसरे वर्ष की मार्क्सशीट इसी में भेजेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इन डाक्यूमेंट का वेरिफिकेशन आसानी से हो सकेगा। विद्यार्थी को भी ओरिजनल डाक्यूमेंट लेकर यहां-वहां आना जाना नहीं पड़ेगा। वह अपने डिजिटल लॉकर नंबर से इसे वेरीफाई करा सकेगा।
आधार से लिंक होने पर आएगा पूरा डाटा
डॉ. राजीव ने बताया कि विद्यार्थी अपने डिजिटल लॉकर को आधार से लिंक करेंगे। इसके बाद उनके हाईस्कूल, इंटर की मार्क्सशीट-सर्टीफिकेट आदि भी इस डिजिटल लॉकर में आ जाएंगे। विद्यार्थी चाहेंगे तो अपने अन्य डाटा भी इसमें सुरक्षित रख सकेंगे।