राजधानी में भाजपा से निष्कासित किए गए डेढ़ सौ नेताओं को
दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया।
नगर निगम चुनाव में ये नेता पार्टी
के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ लड़े थे। लाख जतन के बाद भी वे चुनाव मैदान
से नहीं हटे थे।
पार्टी का एक खेमा जहां इस कदम की तरफदारी कर रहा है,
वहीं एक तबका ऐसा भी है जो इसे सिद्धांतों के साथ समझौता बताते हुए नाराज
है। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर कोई मुंह नहीं खोल रहा है।
लखनऊ
नगर निगम चुनाव में टिकट न मिलने पर अमित सिंह पत्तू ने विद्रोह कर दिया
था। वह अयोध्यादास वार्ड से टिकट मांग रहे थे।
उन्हें हाल ही में पार्टी
में शामिल कर लिया गया। इसी तरह निशातगंज वार्ड से चुनाव लड़ने वाले
जितेंद्र सोनकर को भी दोबारा सदस्यता दे दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक
डेढ़ सौ बागी पार्टी में दोबारा स्थान पा चुके हैं। इन्हें चुनाव संबंधी
जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
पार्टी नेता शिव भूषण का कहना है कि लोकसभा
चुनाव में ऐतिहासिक सफलता के लिए सभी का साथ जरूरी है। इसलिए इन पार्षद
प्रत्याशियों को पार्टी में शामिल किया गया।
दूसरी
ओर भाजपा में एक तबका ऐसा है, जो इस फैसले को पचा नहीं पा रहा है।
उनका
कहना है कि निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर बाड़मेर से लड़ने वाले पूर्व
केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया
गया, फिर पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़े इन प्रत्याशियों को कुछ ही समय बाद
गले लगाना ठीक नहीं। इनकी वजह से हार गए प्रत्याशी हमसे दूर छिटकेंगे।