ओम शांति ओम से लेकर बाजीराव मस्तानी और फिर पद्मावत जैसी फिल्मों में जिस ग्लैमरस दीपिका पादुकोण को आपने देखा है, वह इस बार अपनी आगामी फिल्म ‘छपाक’ में बिल्कुल नए अवतार में दिखाई देंगी। एसिड अटैक फाइटर लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार में दीपिका ने जिस शिद्दत के साथ काम किया है, उससे वे अभी तक बाहर नहीं आ पाई हैं। यह कहना है खुद दीपिका का। वे कहती हैं कि शूटिंग के वक्त उन्होंने हर पल लक्ष्मी के दर्द को महसूस ही नहीं किया बल्कि उसे जीया भी।
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दीपिका ने साझा किए अनछुए पहलू
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को ‘छपाक’ की टीम के साथ लखनऊ आईं दीपिका ने होटल ताज में एक खास बातचीत में बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार ऐसे मौके आए कि जब लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार में ढलते वक्त वे काफी इमोशनल हो गईं। कहती हैं कि लक्ष्मी की जिंदगी को पर्दे पर उतारना उनके लिए हर पल लक्ष्मी के दर्द को महसूस करने जैसा था।
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दीपिका पादुकोण
- फोटो : अमर उजाला
खासकर तब, जबकि लक्ष्मी खुद उनके सामने रहती हो। बताती हैं कि यह उनकी ऐसी पहली फिल्म है जिसका मुख्य किरदार खुद जीवित है, तो ऐसे में उस किरदार के साथ न्याय कर पाने में उस चरित्र के भीतर इस कदर डूबना पड़ा कि आज भी उससे बाहर निकल पाना मुश्किल हो रहा है।
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दीपिका ने साझा किए अनछुए पहलू
- फोटो : अमर उजाला
किरदार के लिए ‘हां’ करने में लगे सिर्फ दो मिनट
दीपिका कहती हैं कि फिल्म की डायरेक्टर मेघना गुलजार ने जब उन्हें छपाक की कहानी सुनाई तो उन्होंने दो मिनट में ही इस फिल्म में काम करने के लिए हां कर दी। साथ ही इस फिल्म को प्रोड्यूस भी किया।
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दीपिका पादुकोण अपने पति रणवीर सिंह के साथ
- फोटो : अमर उजाला
...ताकि समाज में जाए सकारात्मक संदेश
एक सवाल के जवाब में दीपिका ने कहा कि यह सच है कि फिल्म में अभिनेत्रियों की खूबसूरती मायने रखती है। लेकिन एसिड अटैक जैसा घृणित कृत्य, दुष्कर्म से भी ज्यादा खौफनाक है। हम इस फिल्म के जरिए समाज को संदेश देना चाहते हैं, जिससे इस तरह की घटनाओं में कमी आए और लोग जागरूक हों।
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दीपिका पादुकोण और लक्ष्मी
- फोटो : अमर उजाला
ये तीन लड़कियां बदलेंगी समाज की सोचः लक्ष्मी
अपनी जिंदगी पर बनी इस फिल्म के बारे में लक्ष्मी अग्रवाल कहती हैं कि मेघना गुलजार की सोच पर हम तीनों लड़कियों ने मिलकर काम किया। फिल्म का उद्देश्य है, समाज को जागरूक करना ताकि किसी की जिंदगी एसिड अटैक की वजह से बर्बाद न हो। वे कहती हैं कि इस फिल्म के जरिए हम तीनों लड़कियों ने कमाल करने की कोशिश की है।
हमारी कोशिश है कि समाज की सोच बदले। लक्ष्मी का मानना है कि एसिड अटैक का शिकार न सिर्फ लड़कियां व महिलाएं होती हैं बल्कि पुरुष भी होते हैं। यह समाज पर कलंक की तरह है। वे कहती हैं कि लाख कोशिशों के बावजूद भी दुकानों पर एसिड मिल रहा है और हर उम्र के लोग इसे खरीद रहे हैं। इस पर सख्ती से प्रतिबंध लगना चाहिए।