दीपावली के दिन रविवार को धन और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी के पूजन के लिये शाम 5:55 बजे से रात 7:51 बजे तक पूजन करने का मूहूर्त सबसे शुभ है।
इस समय लक्ष्मीकारक स्थिर वृष लग्न होने के कारण पूजन करना गृहस्थों के साथ ही व्यापारियों के लिये भी सबसे शुभ रहेगा।
ज्योतिषियों के मुताबिक शाम की इस लग्न के अलावा दोपहर और देर रात की अन्य लग्नों में भी पूजन करना श्रेयस्कर रहेगा।
लेकिन, इस बार महज चंद मिनटों के लिये अमावस्या में मिल रही वृष लग्न लोगों को जल्दबाजी में डालेगी।
आचार्य प्रदीप शास्त्री ने बताया कि 2 नवंबर शनिवार की शाम 7 बजे के बाद से अमावस्या लग जायेगी, जो कि रविवार को अगले दिन शाम करीब 6:18 बजे तक रहेगी।
आचार्य के मुताबिक रविवार को गणेश-लक्ष्मी और कुबेर केपूजन के लिये शाम को स्थिर वृष लग्न में 5:55 बजे से रात 7:51 बजे तक दीपावली पूजा का सबसे शुभ मूहूर्त है।
इस लग्न में घरों में गृहस्थों और प्रतिष्ठानों में व्यापारियों का पूजन करना उत्तम रहेगा। इसके अलावा दोपहर में 1:20 से 2:50 बजे तक स्थिर कुंभ लग्न में भी पूजन किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि जो भी व्यापारी गण शाम को लग्न में पूजा करने से चूक जायें तो वे देर रात स्थिर सिंह लग्न में भी रात 12:23 बजे 2:37 बजे तक महालक्ष्मी का पूजन कर सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक दीपावली पर चंद्रमा-सूर्य का योग होने के चलते ही महालक्ष्मी रात्रि विचरण करने के लिये धरा पर आती है। घर-घर विचरण करती हैं, जिस घर या प्रतिष्ठान में उन्हें स्वच्छता, दीपमाला और सुगंधियां मिलतीं हैं, वहीं निवास कर लेती हैं।
मिल रही महज 23 मिनट की वृष लग्न
अमावस्या का मान रविवार 3 नवंबर को शाम 6:18 बजे तक ही रेहगा। ऐसे में शाम को 5:55 बजे शुरू होने वाली वृष लग्न अगले 23 मिनट बाद प्रतिपदा में होगी। ज्योतिषियों का मत है कि चूंकि सुबह उदया तिथि में अमावस्या मिलेगी इसलिये दिन भर अमावस्या का ही मान मानना उत्तम रहेगा।
दीपावली पर दिन भर पूजन के मूहूर्त
कुंभ लग्न-दोपहर में 1:20 से 2:50 बजे तक
वृष लग्न-शाम 5:55 बजे से रात 7:51 बजे तक
सिंह लग्न-रात 12:23 बजे 2:37 बजे तक