याचियों की तरफ से दलील दी गई कि पिछली शिक्षक भर्ती परीक्षा में अनारक्षित व आरक्षित वर्गों के लिए अहर्ता अंकों का कटऑफ क्रमश: 45 व 40 फीसदी था। यह इस परीक्षा में क्रमश: 65 व 60 फीसदी रखा गया है।
याचियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि कटऑफ को इतना बढ़ाया जाना उचित नहीं है क्योंकि इसका सीधा असर परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षामित्रों पर पड़ेगा।
उधर, राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत चंद्रा का कहना था कि प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक मिलें, इस लिहाज से ही इस बार कटऑफ निर्धारित किया गया है जो संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुसार है।
इसके अलावा अन्य पक्षकारों के वकीलों ने भी अपनी दलीलें पेश कीं। इनमें पूर्व पक्षकारों की तरफ से जवाबी हलफनामे भी पेश किए गए।