लखनऊ। नाले के गंदे पानी और सीवर को शोधित करने के लिए करीब पांच वर्ष पहले हाथी पार्क में स्थापित डेढ़ एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) चल नहीं रहा था। जिम्मेदारों को इसकी खबर तक नहीं थी। बीते दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के निरीक्षण में एसटीपी बंद मिला। इसके बाद अब बोर्ड ने संचालन करने वाली फर्म शिवाय कंस्ट्रक्शन को नोटिस जारी किया है।
नगर निगम को भी रिपोर्ट भेजी है।उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि 25 दिसंबर को निरीक्षण के दौरान एसटीपी बंद मिला था। ऐसा क्यों है? संचालन के संबंध में पत्र जारी करने के बाद भी कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई? पत्र के मुताबिक, 13 जनवरी को बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता ने एक बार फिर निरीक्षण किया। उस दौरान भी एसटीपी बंद मिला। जानकारी करने पर वहां मौजूद प्रतिनिधि ने बताया कि सीवेज को भरवारा एसटीपी में शोधित करने के लिए सीवेज पंपिंग स्टेशन भेजा जा रहा है। ऐसी स्थिति में अधिक सीवेज आने पर उसका सीधे गोमती नदी में जाना स्वाभाविक है। यह एसटीपी मेडिकल कॉलेज व आसपास इलाके के गंदे पानी व सीवेज ट्रीटमेंट के लिए बनाया गया है। नोटिस में फर्म को चेतावनी भी दी गई है कि यदि तीन दिन में जवाब न दिया तो पर्यावरणीय अधिनियमों के तहत कार्रवाई की रिपोर्ट अधिकारियों को भेज दी जाएगी। इसमें जुर्माना लगाने और काम से हटाने तक की कार्रवाई हो सकती है।