प्रदेश के कई जिलों में संक्रमण की दर में गिरावट आई है, लेकिन मृत्यु दर कम नहीं हो रही है। इसकी वजह जागरूकता के अभाव के साथ सरकारी मशीनरी की ढिलाई भी है। हालत यह है कि 26 अप्रैल को सभी जिलों में कम से कम दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को कोविड अस्पताल बनाने का निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई जगह अभी तक यह व्यवस्था नहीं हो पाई। इसी तरह 5 मई से शुरू हुआ गांव-गांव कांट्रैक्ट ट्रेसिंग का अभियान भी वायरस की चपेट में आने वालों को अस्पताल तक नहीं पहुंचा पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों का मरीज जब तक अस्पताल पहुंचता है तब तक उसका फेफड़ा पूरी तरह से संक्रमित हो जाता है। ऐसे में अस्पताल में पहुंचने के बाद भी मरीज की मौत हो जाती है। पेश है विभिन्न जिलों की स्थितियों की पड़ताल करती रिपोर्ट :
ऑक्सीजन व्यवस्था सुधरी पर रिपोर्ट मिलने में देरी
अंबेडकरनगर जिले में तीन-चार दिन से ऑक्सीजन की व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी कोरोना रिपोर्ट 2-से 3 दिन में मिल रही है। यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर और महिला एवं शिशु विंग टांडा में एल-टू की सुविधा है, लेकिन अन्य सीएचसी को अभी तक कोविड हॉस्पिटल नहीं बनाया जा सका है। बुखार की चपेट में आने के बाद तमाम मरीज घरेलू उपचार अपनाते हैं। जब तक अस्पताल पहुंचते हैं तो उनका ऑक्सीजन लेवल काफी नीचे चला जाता है, जिससे मौत हो जाती है।
बलरामपुर जिले में मृत्यु दर 1.67 फीसदी है। संयुक्त जिला चिकित्सालय को एल-2 हॉस्पिटल बनाया गया है। दो सीएचसी में एल-वन की सुविधा है। आरटी-पीसीआर रिपोर्ट 3 से 4 दिन में मिल रही है। करीब 1.48 फीसदी मृत्यु दर वाले गोंडा में भी रिपोर्ट 5 दिन बाद मिल रही है और कांट्रैक्ट ट्रेसिंग की व्यवस्था भी फेल है। छपिया, हलधरमऊ, वजीरगंज व काजीदेवर सीएचसी को अभी कोविड हॉस्पिटल बनाने प्रक्रिया अभी शुरू की गई है।
चंदौली में मृत्यु दर 1.71 फीसदी है। यहां पंडित कमलापति त्रिपाठी जिला अस्पताल के एमसीएच विंग और संयुक्त जिला चिकित्सालय, चकिया को एल-2 अस्पताल बनाया गया है। भोगवारे और धानापुर सीएचसी को एल-1 अस्पताल बनाने की योजना है, पर अभी तक नहीं बनाया जा सका है। आरटी-पीसीआर रिपोर्ट तीन से चार दिन में आ रही है।
यहां पंचायत चुनाव के बाद मरीजों की संख्या और मृत्यु दर में बढ़ोतरी हुई है। 1.51 फीसदी मृत्यु दर वाले भदोही जिले में भी मरीज अस्पताल देरी से पहुंच रहे हैं। ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जनपद में रोजाना औसतन 6 लोगों की कोरोना के चलते मौत हो रही है।
जब तक मिलती रिपोर्ट, बिगड़ जाती हालत
बस्ती जिले में मेडिकल कॉलेज के अलावा एल-वन अस्पताल की सुविधा है। मुंडेरवा और रुधौली सीएचसी को कोविड बनाने की प्रक्रिया चल रही है। यहां जांच रिपोर्ट तीन दिन बाद मिल रही है। ऐसे ही फतेहपुर जिले की मृत्यु दर 1.79 फीसदी है। जिले में सीएचसी थरियांव को एल-1 व इलाहाबाद पॉलिटेक्निक पुरइन, सीएचसी बिदंकी को एल-2 और जिला अस्पताल में एक कोरोना वार्ड बनाया गया है। यहां भी जांच रिपोर्ट के लिए तीन से पांच दिन का इंतजार करना पड़ता है। इसके चलते इलाज में देरी होती है।
जल्द से जल्द कराएं जांच
डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जेडी रावत का कहना है कि जब हालत गंभीर हो जाती है तब मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। रिपोर्ट आने में भी देरी होती। ऐसे में संक्रमण बढ़ जाता है। फिर उसे लेवल-3 के अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। दूरदराज वाले जिलों से जो मरीज लेवल-3 में पहुंचते भी हैं उन्हें बचाना काफी मुश्किल होता है। सीएचसी को जल्द से जल्द कोविड अस्पताल में बदलना चाहिए ताकि लोगों को सही समय पर इलाज मिल सके। मरीजों को भी जागरूकता दिखानी होगी और लक्षण दिखते ही जांच कराना होगा।
14 मई तक के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो देशभर में मिले कुल मरीजों में दम तोड़ने वालों का औसत 1.08 फीसदी है। प्रदेश में यह ग्राफ 1.06 फीसदी है। जबकि अंबेडकरनगर में 2.61, बस्ती में 2.13, हरदोई में 2.13 फीसदी है। कानपुर नगर में 1.92, इटावा में 1.80 और फतेहपुर 1.79 फीसदी है। इसी तरह चंदौली में 1.71, बलरामपुर में 1.67, भदोही में 1.51, गोंडा में 1.48, फिरोजाबाद में 1.46 और जालौन में 1.44 फीसदी है।
कम मृत्यु दर वाले जिले
शामली 0.32, अलीगढ़ 0.41, बरेली 0.57, बदायूं 0.59, गौतमबुद्धनगर 0.63 फीसदी। जबकि राजधानी लखनऊ में 0.95, वाराणसी 0.98, गाजियाबाद 0.71 फीसदी।
पटना एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. जीके सिंह का कहना है कि महानगरों में वायरस का असर कम हो गया है। यहां संसाधन भी अधिक है। ग्रामीण इलाके के जिलों में अभी संसाधनों की कमी है। जागरूकता का भी अभाव है। वायरस का असर होने के बाद भी लोग सामान्य बुखार समझकर घर में पड़े रहते हैं। हालत गंभीर होने पर अस्पताल का रुख करते हैं। संभव है कि देर से इलाज शुरू होने की वजह से मरने वालों की संख्या ज्यादा है। इन जिलों में कांट्रैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने की जरूरत है।
अगले सप्ताह से कम होने लगेगी मृत्यु दर
महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि अधिक मृत्यु दर वाले जिलों की समीक्षा की जा रही है। इसके कई अलग-अलग कारण हैं। संबंधित जिलों के सीएमओ को दूरदराज के सीएचसी को कोविड अस्पताल में तब्दील करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑक्सीजन सप्लाई से लेकर अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त की जा रही है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह से यहां भी मृत्यु दर कम होने लगेगी।