राजधानी में संक्रमण की दर भले ही कम हो रही है, पर मौत के आंकड़े और भयावह होते जा रहे हैं। अप्रैल के पूरे महीने जहां मृत्यु दर आधा फीसदी थी तो वहीं मई के पहले हफ्ते में ही यह एक फीसदी के पार पहुंच गई है।
हालांकि, मौत के आंकड़े में भी लखनऊ में बराबर उतार चढ़ाव जारी है। सरकार की गाइडलाइन के हिसाब से सामान्य तौर पर 10 दिन में संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है जबकि लक्षण न होने के मामलों में तीन दिन में ही संक्रमित को स्वस्थ माना जाता है।
अभी तक के अनुभव के अनुसार, जिन संक्रमितों की मौत हुई उनमें गंभीर लक्षण थे। लखनऊ में मार्च में संक्रमण की दूसरी लहर आई।
मार्च में तो मौत के आंकड़े बहुत ज्यादा नहीं बढ़े, पर अप्रैल आते ही हर दिन औसतन 20 लोगों की मौत होने लगी।
संक्रमित व्यक्ति के 10 दिन में स्वस्थ होने का आंकड़ा मानते हुए इस दौरान हुए कुल संक्रमण पर अगर मौत की दर निकाली जाए तो पूरे अप्रैल में यह आधा फीसदी के करीब रही। वहीं, मई के पहले सात दिन में यह दोगुनी हो गई है।
संक्रमण से मृत्युदर की रफ्तार एक नजर में
तारीख कुल संक्रमण कुल मौत मृत्यु दर (प्रतिशत में)
1- 10 अप्रैल 16521 91 0.55
11-20 अप्रैल 53337 244 0.45
21-30 अप्रैल 48317 257 0.53
1-7 मई 14936 170 1.13
स्वस्थ होने की दर अब रोजाना सौ फीसदी से अधिक
नए मामलों के कम होने के साथ ही दूसरी अच्छी खबर रोजाना स्वस्थ होने वालों का अच्छा आंकड़ा भी है। दो सप्ताह से संक्रमितों से ज्यादा रोज स्वस्थ होने वालों का ग्राफ है। अप्रैल के पहले सप्ताह में संक्रमितों के मुकाबले स्वस्थ होने की दर 25.60 प्रतिशत थी। अब यह दर रोजाना सौ फीसदी से ज्यादा है।
एक दिन में सर्वाधिक मौत का नया रिकॉर्ड
बृहस्पतिवार को 65 मरीजों की मौत हो गई। इससे पहले एक दिन में सर्वाधिक मौत का रिकॉर्ड 24 अप्रैल को बना था। उस दिन 42 लोगों की मौत हुई थी।
कुल मौतों में से 40 फीसदी सिर्फ 37 दिन में
संक्रमण से अभी तक कुल 1969 मौतें हुई हैं। इनमें से 40 फीसदी अकेले अप्रैल और मई में हुई हैं। अप्रैल के 30 और मई के सात दिन में वायरस ने 762 लोगों की जान ली है।