अवध अस्पताल में बुजुर्ग को इलाज के नाम पर पहले तो भर्ती किया गया। उसके बाद पैसे की उगाही करने के लिए डायलिसिस की गई तो दवाओं के नाम पर एक लाख 35 हजार रुपये वसूल लिए।
हालत बिगड़ने पर मरीज को आईसीयू में भर्ती कर दिया, लेकिन परिवारीजनों को उसे न तो देखने दिया और न ही स्थिति बताई।
देर रात मरीज की मौत के बाद घरवालों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
परिवारीजनों ने मामले की शिकायत सीएमओ से करने की बात कही है।
डुमरियागंज सिद्धार्थनगर निवासी राम प्रकाश पांडे (62) को एक मई को आलमबाग के अवध अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
उनके बेटे रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि बृहस्पतिवार को सीने में दर्द और सांस लेने में दिक्कत के बाद इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
मरीज को हृदय की समस्या के बारे में डॉक्टर को जानकारी दी गई।
बावजूद डॉक्टर ने किडनी की समस्या बता डायलिसिस शुरू कर दिया। पांच दिन में तीन बार डायलिसिस के लिए 90 हजार रुपये वसूल लिए।
इसके बाद दवा के लिए करीब 45 हजार रुपये लिए गए।
पहले दिन डायलिसिस के बाद मरीज की हालत गंभीर बताकर आईसीयू में भर्ती कर दिया।
चार दिन तक मरीज को आईसीयू में रखा, लेकिन डॉक्टर ने मरीज की हालत के बारे में परिजनों को कोई जानकारी नहीं दी।
सोमवार रात में दस बजे मरीज की अचानक सांस फूलने लगी। सूचना पर जब तक डॉक्टर पहुंचे मरीज की मौत हो गई।
इसकी जानकारी जब डॉक्टर ने परिवारीजनों को दी तो वे वार्ड में बेसुध होकर रोने लगे।
परिवारीजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। अन्य लोगों ने स्थिति संभाली और शव ले जाने लगे।
तभी अस्पताल प्रशासन ने बकाया बारह हजार रुपये का बिल अदा किए बिना बॉडी देने से इन्कार कर दिया।
इसके बाद परिवारीजनों ने पैसे अदा किए। इसके बाद शव परिवारीजनों को सौंप दिया गया।
बुजुर्ग के बेटे का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर जमकर लूट हुई है।
इलाज का ब्यौरा मांगने पर अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा आधा-अधूरा कागज दिया गया।
मरीज की मौत के बाद भी बारह हजार रुपये लिए गए, जिसका कोई कागज नहीं दिया गया।
इलाज करने वाले डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्होंने मामले की शिकायत सीएमओ और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से की है।