ये तस्वीरें हैं लखनऊ विश्वविद्यालय मुख्य कैम्पस की है। 25-30 स्टूडेंट की इस भीड़ को देखकर आप ये सोच रहे हों कि काउंसलिंग या कोई डिस्कशन की तस्वीर है तो ऐसा नहीं है। ये छात्र-छात्राएं बीएड में दाखिले के लिए यहां आए हैं। वह भी सब हरदोई से। तस्वीर में कागजों का पुलिंदा लिए बैठा जो शख्स नजर आ रहा है, ये इन स्टूडेंट्स के दस्तावेज हैं।
यही नहीं उनके रजिस्ट्रेशन के ड्राफ्ट भी हैं। पर, चौंकाने वाली बात है कि एलयू के मुख्य कैम्पस में बीएड की कोई काउंसलिंग नहीं चल रही है। फिर ये भीड़ यहां क्यों? ये भीड़ भले ही एलयू प्रशासन को नहीं चौंकाती हो, पर इनका मकसद जानकार आप जरूर हैरान होंगे। बीएड की काउंसलिंग में दलाल सक्रिय हैं।
इन दलालों का काम है स्टूडेंट्स को निजी कॉलेजों में दाखिला दिलवाकर उनकी सीटें भरवाना। अब तो दलालों का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि वे एलयू कैम्पस के अंदर भी अपनी दुकान जमाने से हिचक नहीं रहे हैं। इस पूरी कहानी को आसानी से आप समझ सकें इसलिए हम वह सबकुछ वैसा ही बता और दिखा रहे हैं, जैसा वहां चल रहा था।
शुक्रवार दोपहर के तीन बजे हैं। विश्वविद्यालय में सीपीएमटी भवन के पास पार्क के सामने एक पेड़ के नीचे अचानक भीड़ लगना शुरू हो गई। ये देखकर माथा ठनका...। पूछते ही जवाब आता है-हम सभी बीएड में दाखिला लेने आए हैं। छात्र-छात्राओं के घेरे के बीच बैठा शख्स इनके फॉर्म और ड्राफ्ट इकट्ठे करके फाइल तैयार करा रहा है।
छात्र-छात्राओं के बीच खुद को स्टूडेंट बताते हुए सवाल किए। दाखिले में रुचि दिखाई तो दो-तीन ने बताया कि वे सब हरदोई के हैं। ब्रह्मेश नामक शख्स उन्हें बीएड में दाखिला दिलाने के लिए ले आया है। इन्हें हरदोई से लाने का इंतजाम और खाने-पीने का इंतजाम भी ब्रह्मेश ने किया है। बैंक में ड्राफ्ट बनवाने के लिए भी उन्हें नहीं दौड़ना पड़ रहा। ....और ब्रह्मेश के आते ही सब काउंसलिंग सेंटर की ओर चल दिए
दलाल ने बताया, कॉलेजों से है सेटिंग
कागज तैयार करते छात्र
- फोटो : amar ujala
दोपहर के करीब 3.30 बजे 35 साल का एक युवक पहुंचा। इशारों में एक स्टूडेंट बताता है कि यही हमें यहां लेकर आए हैं। यह शख्स पहुंचते ही सबको लेकर आर्ट्स कॉलेज में बने काउंसलिंग सेंटर्स की तरफ ले जाने लगा।
सर हमें भी बीएड में दाखिला लेना है। आप हमारी कैसे और क्या मदद कर सकते हैं? जब रिपोर्टर ने ब्रह्मेश नामक शख्स से सवाल किया तो उसने कहा- मेरे पास लखनऊ के कई निजी कॉलेज हैं। एडमिशन का काम मेरा भाई चंद्रेश देखता है।
ब्रह्मेश बोला-जिन कॉलेजों में हमारी सेटिंग है वहां प्रवेश लेने पर कक्षाएं करने की जरूरत नहीं। प्रैक्टिकल में भी अच्छे अंक मिलने की गारंटी है। कोई अगर लखनऊ के बाहर का है तो उनको परीक्षा के समय केंद्र पर लाने-ले जाने के लिए हम गाड़ी भी मुहैया कराते हैं।
यदि लगातार दो दिन परीक्षा हो तो जिस शहर में परीक्षा केंद्र होगा वहां होटल में मुफ्त में रहने की व्यवस्था भी कराई जाएगी। प्रवेश केलिए कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं देना है। ....बात करते हुए वह आर्ट्स कॉलेज की तरफ बढ़ गया।
बेफिक्र हैं दलाल
कॉलेजों से है सेटिंग
- फोटो : amar ujala
पूरे प्रदेश में बीएड की एक लाख से अधिक सीटें खाली रहने की स्थिति बनी हुई है। निजी कॉलेजों की सीटें भरवाने के लिए कॉलेजों से साठगांठ से यह सबकुछ चल रहा है। बीएड काउंसलिंग की शुरुआत से ही आर्ट्स कॉलेज परिसर में दलालों के सक्रिय होने के प्रकरण सामने आ रहे हैं। परिसर के अंदर खुले आम निजी कॉलेजों की दुकाने सजी हई हैं।
लेकिन विश्वविद्यालय की लापरवाही के चलते इनकी रोकथाम तो नहीं हुई, हां संख्या बढ़ जरूर गई। अनदेखी से इनका दुस्साहस इस कदर बढ़ गया कि काउंसलिंग सेंटर के अंदर भी धंधा चलाने लगे। इसी वजह से 22 जून को जहां चॉइस लॉक काउंटर पर बैठे ड्यूटी स्टाफ का स्थान बदला गया, वहीं 23 जून को तो काउंसलिंग सेंटर के अंदर अभ्यर्थियों के साथ पकड़े जाने पर बाहर निकाला गया।
पर दलाल भी विश्वविद्यालय के सुस्त रवैये को जानते हैं इसीलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। अब तो वह आर्ट्स कॉलेज के साथ ही एलयू मुख्य परिसर के अंदर भी दुकान चमका रहे हैं।