हजरतगंज स्थित लक्ष्मण मेला मैदान की टूटी रेलिंग से गोमती में गिरे राज सोनकर (9) का शव बुधवार की दोपहर एक बजे गोताखोरों की मदद से निकाल लिया गया। 22 घंटे के बाद मिले शव को देख परिजनों में कोहराम मच गया। लाडले का शव देखकर पार्वती बेसुध हो गईं।
मोहल्ले की महिलाओं ने किसी तरह उन्हें संभाला। इससे पहले दोपहर करीब 12 बजे एसडीआरएफ के सर्च ऑपरेशन को लेकर स्थानीय लोगों की पुलिस वालों से नोकझोंक भी हुई थी।
राज के मामा मंगल ने बताया कि देर रात अंधेरा होनी से एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन रोक दिया गया था। सुबह होते ही एसडीआरएफ ने फिर से राज की तलाश में स्टीमर लेकर सर्च ऑपरेशन शुरु किया। कई घंटे तक यह देख परिजन और स्थानीय लोग भड़क उठे और हंगामा शुरू कर दिया।
इस बीच पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। मंगल के अनुसार, दोपहर करीब 12 बजे स्थानीय गोताखोर पहुंचे और एक बजे बच्चे के शव को बरामद कर लिया।
22 घंटे के बाद नदी से राज का शव निकाला जा सका। बेटे का शव पार्वती चीख मारकर बेहोश हो गईं। पिता संतोष का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने तत्काल शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया।
परिजनों ने लगाया पुलिस को लापरवाही को आरोप
राज के परिजनों और स्थानीय लोगों ने हजरतगंज पुलिस पर समय रहते कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि अगर समय से एसडीआरएफ को सूचना दे दी गई होती तो पहले ही बच्चे का शव मिल जाता। स्थानीय समाजसेवी राकेश चौधरी ने जब जिलाधिकारी के फोन पर सूचना दी, तब जाकर तीन घंटे के बाद एसडीआरएफ की एक टीम मौके पर पहुंची और सात बजे के बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया।