लखनऊ। शहर के सबसे व्यस्त और वीवीआईपी इलाकों में शामिल 1090 चौराहा, समतामूलक चौक और महात्मा गांधी मार्ग पर होर्डिंग अवैध तरीके से लगाए गए हैं, जो राहगीरों के लिए मौत का जाल बन गए हैं। नियमों के विपरीत ये होर्डिंग न केवल सड़क के बेहद करीब हैं, बल्कि इनकी ऊंचाई जमीन से महज पांच फीट से भी कम है। ऐसे में मोड़ पर मामूली सी चूक किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
नगर निगम की प्रचार नियमावली के अनुसार राजभवन, विधानभवन, उच्च न्यायालय और ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास नो-होर्डिंग जोन घोषित है। इसके बावजूद हजरतगंज से लेकर चारबाग और गोमतीनगर के प्रतिबंधित क्षेत्रों में धड़ल्ले से होर्डिंग लगे हैं। जिम्मेदारों की चुप्पी का आलम यह है कि सरकारी प्रचार की आड़ में ठेकेदार इन पर व्यावसायिक और राजनीतिक विज्ञापन लगाकर अपनी जेबें भर रहे हैं।
ये है नियम और हकीकत
चौराहे के मोड़ से 20 मीटर के दायरे में होर्डिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है, मगर 1090 और समतामूलक जैसे व्यस्त चौराहों के बिल्कुल मोड़ पर ही खंभे गाड़ दिए गए हैं। इसके अलावा, होर्डिंग का ढांचा जमीन से कम से कम 6 फीट ऊपर होना चाहिए, मगर पांच फीट से भी कम ऊंचाई होने के कारण वाहन चालकों के टकराने का खतरा बना रहता है।
नगर निगम और सूचना विभाग के बीच फंसा पेंच
सूत्रों के मुताबिक, इन होर्डिंग्स को सूचना विभाग की अनुमति का हवाला देकर लगाया गया है, जिसके कारण नगर निगम इन पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है, मगर चौंकाने वाली बात यह है कि इन होर्डिंग्स का प्रचार शुल्क भी नगर निगम के खजाने में जमा नहीं हो रहा है। ठेकेदार सरकारी संरक्षण की आड़ में यातायात सुरक्षा को ताक पर रखकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
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यहां भी खतरा
1090 चौराहा : सड़क की सीमा के अंदर लगे लोहे के ढांचे।
गांधी सेतु : संकरी सड़क पर कम ऊंचाई वाले बोर्ड।
अशोक मार्ग : आयकर कार्यालय के सामने प्रतिबंधित क्षेत्र में होर्डिंग।
हजरतगंज : इलाहाबाद बैंक चौराहे से लेकर चरन होटल तक अवैध विस्तार।
Iअवैध होर्डिंगों को हटाने का अभियान चलाया जाता है। जो होर्डिंग नियमों के विपरीत लगते हैं, उन्हें हटाया भी जाता है। जहां होर्डिंग खतरनाक तरीके से लगे हैं, उनका सर्वे कराकर संबंधित विभाग को हटाने के लिए पत्र भेजा जाएगा। I
I- पंकज श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्तI
मोड़ पर लगे होर्डिंग।
मोड़ पर लगे होर्डिंग।
मोड़ पर लगे होर्डिंग।
मोड़ पर लगे होर्डिंग।
मोड़ पर लगे होर्डिंग।