लखनऊ। खतरनाक मांझे ने बुधवार को दुबग्गा के शोएब की जान ले ली। इसके बाद जागी पुलिस ने बृहस्पतिवार को दुकानों पर छापा मारा। इस बीच सुशांत गोल्फ सिटी इलाका निवासी ब्रजेश को भी खतरनाक मांझे ने लहुलूहान कर दिया। चिंता की बात यह है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई सख्ती पर भी खतरनाक मांझा बिक रहा है।
राजधानी में पतंग बेचने वालों का दावा है कि खतरनाक मांझा ऑनलाइन मोना काइट नाम से बिकता है। ऑनलाइन बिक्री पर कोई रोक नहीं है। हुसैनगंज के महाराणा प्रताप चौराहे के पास 75 साल पुरानी हाजी सुबराती पतंग दुकान है। इसके मालिक सुल्तान अहमद बताते हैं कि वे कपास के धागे से बना मांझा बरेली से मंगवाते हैं। यह मांझा जानलेवा नहीं होता और दबाव पड़ने पर तुरंत टूट जाता है। इस मांझे को पांच मिनट के लिए पानी में डाल दिया जाए तो इसका रंग व उससे लगी चावल व पत्थर की परत उतर जाती है।
सुल्तान अहमद बताते हैं कि खतरनाक मांझा नायलॉन और केमिकल से तैयार किया जाता है। यह आसानी से नहीं टूटता है।
सुल्तान अहमद ने बताया कि पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाली सद्धी दिल्ली और आगरा से आती है। उनके बेटे फरमान अहमद ने बताया कि खतरनाक मांझा ऑनलाइन आसानी से मिल जाता है। यह सामान्य मांझे से सस्ता होता है। इस कारण युवा इसे पसंद करते हैं।
चौक के नादान महल रोड स्थित देवेंद्र काइट सेंटर के मालिक देवेंद्र कुमार गुप्ता पतंग विक्रेता एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष है। उन्होंने बताया कि वे लोग काफी समय से खतरनाक मांझे की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मांझा बिकता ऑनलाइन है और परेशान स्थानीय दुकानदारों को होना पड़ता है। उन्होंने खतनाक मांझे की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
तार, मछली पकड़ने वाली डोर भी बांधी जाती है
पतंगबाजी से जुड़े लोगों ने बताया कि पेंच काटने की होड़ में कुछ लोग तार या मछली पकड़ने वाली डोर बांध लेते हैं। ये दोनों जानलेवा होती है। तार की वजह से शार्ट सर्किट भी हो जाता है। कई बार पतंगों में बंधे तार से मेट्रो की लाइन बाधित हो चुकी है। इस पर एफआईआर भी कराई गई, पर हुआ कुछ नहीं। जेसीपी कानून-व्यवस्था बबलू कुमार का कहना है कि खतरनाक मांझा ऑनलाइन बिक रहा है तो उसकी जानकारी लेकर संबंधित प्लेटफार्म से पत्राचार किया जाएगा। लोगों से भी यह मांझा न खरीदने की अपील है।