लखनऊ। कथक गुरु लच्छू महाराज को उनकी पुण्यतिथि पर विद्यार्थियों ने नृत्यांजलि देकर नमन किया। पं. बिरजू महाराज कथक संस्थान और भातखंडे संस्कृति विवि के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में गुरु स्मरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान लखनऊ कथक घराने के यशस्वी गुरु की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
प्रथम चरण में आदि गुरु शंकराचार्य की रचना ‘गुरु अष्टकम्’ की प्रस्तुति संस्थान के विद्यार्थियों ने की जिसके बोल थे ‘शरीरं स्वरूपं तथा व कलत्रं’। इसमें संगीत निर्देशन मीना वर्मा का रहा और तबले पर संगत की नितीष भारती ने। विद्यार्थियों में श्रीया, शीलू, स्वस्ति, मानसी, दीवा, आराधना यादव, स्वर्णिमा, आराधना सिंह, षिखा, अवीहा, प्रतिमा और रंजना ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इसके बाद गुरु लच्छू महाराज पर आधारित ‘वृत्त चित्र’ का संचालन किया गया जिसमें उनके द्वारा नृत्य निर्देशित की गईं विभिन्न फिल्मों जैसे मुग़ल-ए-आज़म, पाकीजा, काला पानी, तीसरी कसम आदि का चित्रण किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में वाराणसी से डाॅ. रुक्मिणी जायसवाल व साथी कलाकारों ने राग शंकरा चैताल में निबद्ध ‘जय महेश जटाजूट कंठ सोहे कालकूट’ की प्रस्तुति दी। इसके बाद बिंदादीन महाराज की राग पहाड़ी में निबद्ध रचना दादरा ‘छोड़ो-छोड़ो बिहारी नारी देखे सगरी’ की प्रस्तुति दी गई। राग सूर मल्हार पर आधारित बंदिश ‘बादरवा बरसन को आए’ से समापन हुआ।
भातखण्डे संस्कृति विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कथक जगत से जुड़े विद्यार्थियों, कथक प्रेमियों एवं रंगकर्मियों को आचार्य लच्छू महाराज के जीवन व उनके कथक नृत्य की बारीकियों से परिचित कराया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी व अभिनेता डाॅ. अनिल रस्तोगी के अलावा पंडित बिरजू महाराज कथक संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर, उपाध्यक्ष डाॅ. मिथिलेश तिवारी, विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह और सहायक निदेशक तुहिन द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में गुरु स्मरण कार्यक्रम में कथक की प्रस्तुति देते कला
कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में गुरु स्मरण कार्यक्रम में कथक की प्रस्तुति देते कला