फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP News: बांधों और तालाबों से पैदा होगी 6384 मेगावाट बिजली, अकेले बुंदेलखंड में 3044 मेगावाट का लक्ष्य

Mon, 19 Jan 2026 10:31 AM IST
भूपेन्द्र सिंह चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी में अब बांधों और तालाबों से 6384 मेगावाट बिजली पैदा होगी। अकेले बुंदेलखंड के बाधों से 3044 मेगावाट का लक्ष्य रखा गया है। छोटी परियोजनाओं के लिए सोलर कंपनियों के कर्मचारी गांवों में डटे हैं। औद्योगिक इकाइयों और बाजारों के आसपास जमीन तलाश रहे हैं। 
विज्ञापन
बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर लगे सोलर पैनल। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के बांधों और तालाबों से बिजली पैदा की जाएगी। इसके लिए फ्लोटिंग सोलर प्लांट (तैरती सौर ऊर्जा परियोजना) लग रहे हैं। निजी सोलर कंपनियों के कर्मी गांवों में पहुंच गए हैं। वे तालाब पर निगाह रखने के साथ ही बाजार के आसपास छोटी परियोजनाओं के लिए भी जमीन तलाश रहे हैं। ललितपुर के माताटीला बांध पर बुंदेलखंड के सबसे बड़े 588 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जा रहा है। 

विज्ञापन


बांध पर कार्य कर रही कंपनी के अभियंता सौरभ देशपांडे बताते हैं कि उनकी कंपनी अब पांच से 10 मेगावाट के सोलर प्लांट पर फोकस कर रही है। बांदा, हमीरपुर, जालौन और महोबा के कई तालाबों का सर्वे किया जा चुका है। जिला प्रशासन से जरिए सरकारी और निजी तालाब के किराये पर बातचीत चल रही है। महोबा में 15 मेगावाट का प्लांट संचालित करने वाली कंपनी के अभियंता अरविंद तिवारी बताते हैं कि उनकी कंपनी विभिन्न बाजारों और औद्योगिक इकाइयों के आसपास प्लांट लगाने की तैयारी में है। 

बुंदेलखंड में करीब 15 स्थानों पर सर्वे हो चुका है। कुछ जगह किसानों से करार भी हो चुका है, जबकि कुछ स्थानों पर किसान किराया ज्यादा मांग रहे हैं। वह तर्क देते हैं कि छोटे प्लांट में जमीन की जरूरत कम पड़ती है और संबंधित बाजार और औद्योगिक क्षेत्र को उनकी जरूरत के मुताबिक बिजली मिल जाती है।

फ्लोटिंग सोलर से दोहरा फायदा

फ्लोटिंग सोलर में पैनल पानी में तैरते हुए बिजली पैदा करते हैं। नीचे मछली पालन होता है। पैनल से केबिल के जरिए ट्रांसमिशन टॉवर तक एनर्जी जाती है। इंवर्टर, ट्रांसफार्मर और कंट्रोल सिस्टम भी पानी की सतह पर लगाए जाते हैं। यह पानी का वाष्पीकरण कम करता है और पैनल की दक्षता बढ़ाता है। 

पानी में होने की वजह से पैनल ठंडे रहते हैं। प्रदेशस्तर पर फ्लोटिंग सोलर का सबसे बड़ा प्लांट सोनभद्र के रिहंद बांध पर 2146 मेगावाट का प्रस्तावित है, जबकि बुंदेलखंड में राजघाट बांध पर 1114 और माताटीला बांध पर 588 मेगावाट का प्रस्तावित है। सबसे छोटी प्लांट 23 मेगावाट की कबरई बांध पर है।
 

प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्लांट उत्पादन

  • प्रदेशभर में 36 6384
  • बुंदेलखंड में 26 3044

जिलेवार प्रस्तावित फ्लोटिंग सोलर प्लांट

जिला प्लांट संख्या उत्पादन (मेगावाट)
झांसी 10 533
ललितपुर 6 2177
महोबा 4 204
हमीरपुर 3 329
चित्रकूट 3 97
मिर्जापुर 2 129
चंदौली 2 87
सोनभद्र 4 2558
सीतापुर 1 250
गोरखपुर 1 20
विज्ञापन

बुंदेलखंड में ओपेन एक्सेस में प्रस्तावित छोटे प्लांट

प्रदेश में निजी कंपनियां छोटे- छोटे सोलर पावर प्लांट लगा रही हैं। ओपेन एक्सेस के इन प्लांट के जरिए कंपनियां खुद किसानों से करार करके किराये देती हैं। वे अपनी बिजली निजी दुकानदारों अथवा लघु उद्योगों को उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए 33 कंपनियों के अलग- अलग स्थानों पर 753 मेगावाट के प्लांट पाइप लाइन में हैं। इसमें बुंदेलखंड में 481 मेगावाट प्रस्तावित है। 

इनमें महोबा में छह प्लांट से 200 मेगावाट, बांदा में दो प्लांट 65 मेगावाट, चित्रकूट में तीन प्लांट 28 मेगावाट, जालौन में दो प्लांट 20 मेगावाट, ललितपुर में एक प्लांट 50 मेगावाट, झांसी में प्लांट 80 मेगावाट, हमीरपुर की दो प्लांट 15 मेगावाट के प्रस्तावित हैं। हमीरपुर में पांच और चित्रकूट में आठ मेगावाट तक के प्लांट प्रस्तावित है। प्रस्तावित प्लांटों में ज्यादातर 10 मेगावाट तक के हैं।

यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सोलर पावर पार्क आने के बाद बुंदेलखंड में लगातार निजी कंपनियां अपनी परियोजनाएं बढ़ा रही हैं। फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओँ के साथ ही जमीन पर लगने वाली परियोजनाएं पाइप लाइन में हैं। इन पर कार्य चल रहा है। ओपेन एक्सेस सोलर पावर परियोजना लगाने वाली कंपनी खुद किसानों से बातचीत करके जमीन और तालाब ले रही हैं। अगले साल तक इन परियोजनाओं का फायदा दिखेगा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें