उत्तर प्रदेश में डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) में प्रवेश की पटरी से उतरी गाड़ी अब तक लाइन पर नहीं आ सकी है। हालात यह हैं कि जनवरी माह में भी चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है, जबकि सत्र समाप्त होने में कुछ ही महीने शेष हैं। विभाग अब भी छात्रों के लिए रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने की तैयारी में जुटा है।
इस वर्ष पहले अर्हता का मामला हाईकोर्ट में चला, जिसका निस्तारण अक्तूबर में हुआ। इसके बाद प्रवेश के लिए आवेदन लिए गए, जिनकी प्रक्रिया दिसंबर में समाप्त हुई। हालांकि अब तक न तो मेरिट सूची जारी हुई है और न ही प्रवेश की आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकी है। प्रदेश में डीएलएड की कुल 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष मात्र 1.60 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। ये अभ्यर्थी भी डायट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के चक्कर काटने को मजबूर हैं। प्रवेश में हो रही देरी का असर इस बार भी सीटें भरने पर पड़ने की आशंका है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से देशभर के डायट संस्थानों को अपग्रेड करने की कवायद चल रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में डीएलएड की जगह बीएलएड कोर्स शुरू करने की तैयारी है। डीएलएड जहां दो वर्षीय कोर्स है और इसके लिए प्रवेश अर्हता स्नातक है। वहीं, बीएलएड चार वर्षीय होगा और इसकी अर्हता इंटरमीडिएट निर्धारित की जाएगी। बीएलएड करने के बाद अभ्यर्थी बेसिक और माध्यमिक दोनों स्तरों की शिक्षक भर्ती के लिए योग्य होंगे।