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लखनऊ में पकड़ा गया फर्जी कर्नल, सेना भर्ती व मेडिकल कॉलेज के नाम पर वसूलता था इतने रुपये

Sun, 12 May 2019 08:55 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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फर्जी कर्नल पकड़ा गया - फोटो : अमर उजला
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सेना में नौकरी व सेना के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर ठगने वाले गिरोह का विभूतिखंड पुलिस व साइबर सेल ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के एक बदमाश को पुलिस ने रविवार सुबह दबोचा।

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यह खुद को कर्नल बताता था। इसके पास से मोबाइल व सेना की वर्दी बरामद हुई। वहीं, कुछ दस्तावेज मिले, जिनसे जालसाजी के कारनामे का खुलासा हुआ। पुलिस व अन्य खुफिया विंग की टीम जालसाज से पूछताछ कर रही है।

साइबर सेल के नोडल अधिकारी व क्षेत्राधिकारी हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक कुछ दिन पहले शिकायत मिली थी कि सेना में भर्ती के नाम पर लाखों की वसूली हो रही है। ऐसा करने वाले विभूतिखंड इलाके में सक्रिय हैं। 

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इसके बाद साइबर सेल व विभूतिखंड पुलिस की संयुक्त टीम बनाई गई। इसने कई दिनों की तक जालसाजों की रेकी की। इसके बाद रविवार सुबह एक जालसाज को दबोच लिया। पकड़ा गया जालसाज विनम्र खंड-एक का रहने वाला हर्ष वर्धन सिंह है। 

पुलिस ने उसके पास से सेना के कर्नल की दो सेट वर्दी व एक मोबाइल बरामद किया है। मोबाइल में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जिसके आधार पर पुलिस पड़ताल कर रही है।

वर्दी पहनकर ही बेरोजगारों से मिलता था जालसाज

क्षेत्राधिकारी गोमतीनगर अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक जालसाज हर्षवर्धन सिंह अक्सर सेना की वर्दी में ही रहता था। वह बेरोजगारों से नौकरी दिलाने व मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए जब भी बातचीत करता था। 

उस वक्त भी वर्दी में ही रहता था। ताकि उस पर आसानी से भरोसा कर लें। बेरोजगारों से रकम वसूलने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। क्षेत्राधिकारी के मुताबिक सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह काफी बड़ा है।

उसके महज एक हिस्से तक ही पुलिस टीम पहुंची है। जल्द ही अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। ताकि सेना में भर्ती के नाम पर होने वाली ठगी पर शिकंजा कसा जा सके।

खुद दिया था भर्ती के लिए 3 लाख, फिर बन गया गिरोह का सदस्य

प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड राजीव  द्विवेदी के मुताबिक हर्षवर्धन सिंह मूलरूप से अंबेडकरनगर का रहने वाला है। वह विभूतिखंड इलाके में विनम्रखंड कालोनी में किराए केमकान में रहता था। पूछताछ में हर्षवर्धन ने बताया कि उसने तीन साल पहले सेना में भर्ती होने केलिए दिल्ली के एक व्यक्ति को तीन लाख रुपये दिये थे। 

रकम देने केबाद एक साल तक उसे दौड़ाया गया। लेकिन नौकरी नहीं मिली।  इसके जिसे रकम दी थी उसने रुपये कमाने के लिए जालसाजी का रास्ता बताया। रुपये कमाने के लिए हर्षवर्धन ने हामी भर दी। इसके बाद वह दो साल से लगातार इस जालसाज गिरोह के लिए काम करता है। 

इसी गिरोह केसदस्यों ने सेना की वर्दी उपलब्ध कराई थी। जिसे पहनकर वह बेरोजगारों को ठगता था। इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। गिरोह के एजेंट ग्रामीण इलाकों में फैले हैं। जो सेना में भर्ती होने की इच्छा रखने वाले युवाओं को अपनी जाल में फंसाते है। उनसे मोटी रकम वसूलकर काला कारोबार संचालित कर रहे हैं।

राजधानी में उपनिरीक्षक के पद तैनात है पिता

साइबर सेल के उपनिरीक्षक राहुल राठौर के मुताबिक जालसाज हर्षवर्धन सिंह केपिता रमाशंकर सिंह उत्तरप्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक हैं। उनकी तैनाती राजधानी केवजीरगंज थाने में हैं। पुलिस के मुताबिक अपने पिता के पद का भी जालसाज ने दुरूपयोग किया है। 

ठगी के शिकार जैसे ही रकम वापस मांगते तो वह पहले टालमटोल करता। इसके बाद ज्यादा दबाव बनता तो पिता के नाम पर धमकी देकर उनको वापस भेज देता। कोई थाने पहुंचता था तो उस पर समझौते का दबाव बनाकर मामले को रफादफा करवा देता था।

मिलिट्री इंटेलीजेंस व एलआईयू के इनपुट पर हुआ खुलासा

साइबर सेल के नोडल अधिकारी अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक बेरोजगारों की शिकायत मिलने पर जांच शुरू की गई थी। इसी बीच मिलिट्री इंटेलीजेंस की टीम और राज्य अभिसूचना मुख्यालय (एलआईयू हेडक्वार्टर) ने भी इस मामले का इनपुट दिया। 

दोनों विंग के अधिकारियों ने सेना में भर्ती के नाम पर जालसाजों के बड़े गिरोह की राजधानी में मौजूदगी की बात कही। जिसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी गई। यह रिपोर्ट मिलने के बाद संयुक्त टीम ने काम तेज कर दिया। हालांकि जालसाजों में सिर्फ एक ही हाथ लगा। पुलिस के मुताबिक राजधानी में इस गिरोह से करीब एक दर्जन लोगों के जुड़े होने की सूचना मिली है। उनकी तलाश की जा रही है।

तीन से पांच लाख रुपये की करते थे वसूली

पुलिस के मुताबिक सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाला यह गिरोह तीन से पांच लाख रुपये एक बेरोजगार से ऐंठता था। वहीं मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर यह गिरोह कोर्स के मुताबिक रकम वसूलता है। 

यह रकम इसी तरह के कर्नल व मेजर के जरिए मास्टर माइंड तक पहुंचता है। इन कर्नल व मेजर तक बेरोजगारों को पहुंचाने वाले एजेंटों का भी विशेष ख्याल गिरोह रखता था। उनको शिकार खोजने व उन तक पहुंचाने केलिए मोटी रकम बतौर खर्चा दिया जाता है। वहीं काम होने पर इनाम भी मिलता था।
 
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मिलिट्री इंटेलीजेंस सहित कई खुफिया विंग ने की पूछताछ

फर्जी कर्नल की गिरफ्तारी की जानकारी होने के बाद राजधानी की कई खुफिया विंग सक्रिय हो गई। सेना से जुड़ा मामला होने केकारण इस गिरोह का आतंकी संगठनों से संबंध होने की बात भी खंगाली जा रही है। दोपहर बाद विभूतिखंड थाने में मिलिट्री इंटेलीजेंस, एलआईयू मुख्यालय की टीम व कुछ अन्य पुलिस टीम ने आरोपी से पूछताछ की है। 

वहीं एटीएस और एसटीएफ को भी सूचना दी गई है। इन दोनों विंग की भी टीम पूछताछ करेगी। जालसाज को दबोचने में उपनिरीक्षक मोहर अली, राहुल राठौर, हेड कांस्टेबल फिरोज बदर, कांस्टेबल अखिलेश कुमार, शरीफ खान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
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