इंद्रकांत त्रिपाठी (फाइल फोटो)
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महोबा के क्रशर व्यापारी इन्द्रकान्त त्रिपाठी ने खुद गोली मारी थी। मामले की जाँच कर रही एसआईटी ने यह दावा त्रिपाठी की लाईसेंसी पिस्टल की फोरेंसिक जाँच की रिपोर्ट व चश्मदीद गवाहों के बयान के आधार पर किया। एसआईटी ने इस पूरे प्रकरण में महोबा पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। क्रशर व्यापारी द्वारा जिले के तत्कालीन एसपी एमएल पाटीदार समेत अन्य पुलिस कर्मियों पर वसूली का आरोप लगाने वीडियो वायरल होने और उसके बाद व्यापारी की गोली लगने से मौत होने के मामले की जाँच के लिए एसआईटीई का गठन किया गया था। एसआईटीई ने दो दिन पहले जाँच पूरी कर ली थी पर व्यापारी की लाईसेंसी पिस्टल की फोरेंसिक जाँच न मिल पाने की वजह से इसकी रिपोर्ट नहीं सौंपी जा सकी थी।
शुक्रवार को ऊपर से मिले इशारे के बाद एडीजी प्रयागराज प्रेम प्रकाश व एसआईटी के अध्यक्ष आईजी वाराणसी विजय सिंह मीना व अन्य सदस्यों ने महोबा में देरशाम आयोजित एक वार्ता में जाँच में सामने आए तथ्यों का खुलासा किया। बताया गया कि फोरेंसिक जाँच में साबित हो गया है कि जो गोली त्रिपाठी को लगी थी वह उनकी लाईसेंसी पिस्टल से चलाई गई थी। मौके पर सबसे पहले पहुँचने वाले अर्जुन व बालू महाराज के अलावा अन्य लोगों के बयान से भी साबित हुआ कि घटनास्थल पर और कोई नही था। एसआईटी ने अर्जुन व बालू द्वारा इस मामले की सूचना को लेकर की गई काल का आडियो हासिल किया। उसमने भी यह कहा गया कि त्रिपाठी ने गोली मार ली है। यह पिस्टल उन लोगों ने व्यापारी की पत्नी को सौंप दी थी।
एसआईटी ने इस मामले की जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें कहा गया है कि जाँच के क्रम में इन्द्रकान्त की ऑडी कार का सूक्ष्म निरीक्षण भी किया गया व कार से फायर के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बैलेस्टिक साइंस से सम्बन्धित साक्ष्य हासिल किए गए। एसआईटी ने आरोपित पक्ष के परिवार के चार लोगो और इन्द्रकान्त त्रिपाठी के दोनो पार्टनर बाल किशोर एवं पुरूषोत्तम सोनी आदि के कुल सात पिस्टल प्राप्त किये और सभी को बैलेस्टिक परीक्षण के लिए आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा था। मौके की जाँच की गई और एसटीएफ के सहयोग से सीडीआर व मोबाईल डाटा का विश्लेषण किया गया। स्टेट मेडिकोलीगल टीम द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। ऑडी कार से बरामद खोखा कारतूस का मिलान भी विधि विज्ञान प्रयोगशाला से कराया गया।
असल में यह था मामला जिससे पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार घटित हुआ कि कबरई थानाके अन्तर्गत दिनांक नौ अगस्त को जुंए का मुकदमा पंजीकृत किया गया जिसमें इन्द्रकान्त त्रिपाठी नामित नहीं है। किसी अभियुक्त द्वारा गिरफ्तारी के बाद पुलिस अभिरक्षा में दिए गए बयान में भी इन्द्रकान्त के नाम का उल्लेख नही किया गया। फिर भी पुलिस ने अस्वाभाविक विलंब के बाद उनका नाम प्रकाश में लाया गया। इससे जिले की पुलिस की कदाशयता परिलक्षित हुई है। बाद में 30 अगस्त को पुलिस ने त्रिपाठी के खिला धारा 160 में नोटिस जारी किया गया। इससे भी पुलिस की कदाशयता की पुष्टि हुई है।
इस दौरान वीडियो न्यूज पोर्टल पर एक वीडियो अपलोड किया गया जिसमें त्रिपाठी को जुआ खेलते हुए दिखाया गया है। एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बताया गया है कि यह वीडियो तत्कालीन एसपी पाटीदार के निर्देश पर वायरल किया गया। एसआईटी ने पाया है कि इस वीडियो के वायरल होने की वजह से त्रिपाठी अवसाद जैसी मनोदशा में पहुँच गए थे। एसआईटी को महोबा के कई लोगों ने स्थानीय पुलिस की शिकायत की। एसआईटी ने कई पुलिसका उत्तर दायित्व निर्धारित किया है। एसआईटी इन पुलिस कर्मियों की एक रिपोर्ट अलग से शासन को सौंपेगी जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।