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Lucknow News: संसद और सरहद को शहादत देकर सीआरपीएफ ने बचाया

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लखनऊ। डीआईजी सीआरपीएफ राजीव रंजन ने कहा कि देश के दुश्मनों के हमलों को नाकाम करने में सीआरपीएफ के सैकड़ों जवानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। चीन ने 1959 में हुए लद्दाख के हॉट स्प्रिंग पर हमला किया जिसे 21 जवानों ने नाकाम किया। हमले में 10 जवान शहीद हुए। इसी तरह 1965 में सरदार व टाक चौकियों की रक्षा करते हुए बटालियन नंबर-2 की चार कंपनियों के जवानों ने पाकिस्तानी सेना को पीछे धकेल दिया। वे गोमतीनगर स्थित मध्य सेक्टर मुख्यालय में आयोजित सीआरपीएफ दिवस की परेड की सलामी के बाद संबोधित कर रहे थे।
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डीआईजी ने कहा कि 2001 में संसद पर हमले को भी सीआरपीएफ ने नाकाम किया। देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल अयोध्या श्रीराम जन्म भूमि की रक्षा भी सीआरपीएफ ने की। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल मूलतः काउन रिप्रेजेन्टेटिव पुलिस के नाम से 27 जुलाई 1939 को नीमच (मध्य प्रदेश) में स्थापित हुआ था। तत्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के प्रयास से स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात काउन रिप्रेजेन्टेटिव पुलिस को 28 दिसम्बर 1949 में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के रूप में पुन: स्थापित किया गया। इस बल को 19 मार्च 1950 में ध्वज प्रदान किया गया। इस दिन को बल में सीआरपीएफ दिवस परेड के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उन शूरवीर अधिकारियों और कार्मिकों की शहादत को उन्होंने नमन किया, जिन्होंने कर्तव्य की बेदी पर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा अर्द्धसैनिक बल है। इसके बटालियनों की संख्या 247 हो गई है। इसमें 15 आरएएफ बटालियन, 10 कोबरा बटालियन, 05 सिग्नल बटालियन, 06 महिला बटालियन तथा 211 कार्यकारी बटालियन के अतिरिक्त एक एसडीजी व एक पीडीजी बटालियन है।
कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी दिए
सीआरपीएफ से कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी निकले। इसमें तैराकी में खजान सिंह, परमजीत सिंह, भारोत्तोलन में कुंजु रानी, कर्णम मल्लेश्वरी, शूटिंग में टीएस दिल्लन व जीएस रंधावा शामिल हैं। स्थापना दिवस पर डीआईजी सुनील कुमार, आरके सिंह, कमांडेंट व कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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