सीतापुर में क्रासबो शूटिंग चैम्पियनशिप में पहले कंबोडिया फिर गाजियाबाद में तीन बार सोने पर निशाना साधकर अर्चित सिंह ने विश्व स्तर पर भारत के साथ सीतापुर का नाम रोशन किया है। एक के बाद एक अर्चित द्वारा तीन गोल्ड मेडल झटकने से परिवारीजन ही नहीं बल्कि पूरे सीतापुर के वाशिंदे गर्व की अनुभूति कर रहे हैं। अब अर्चित का लक्ष्य कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना है।
जिले के इमलिया सुल्तानपुर कस्बे में रहने वाले अर्चित के पिता तेजपाल सिंह सचिवालय में लिपिक और मां ममता ङ्क्षसह गृहणी हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में परास्नातक तक शिक्षा हासिल करने वाले अर्चित के पिता तेजपाल बताते हैं, कि उसे बचपन से ही निशानेबाजी का शौक है। दूसरे बच्चों की तरह सामान्य खेलों से अलग हटकर अर्चित को बंदूक तथा धनुष से खेलना पसंद था। पढ़ाई के साथ वह निशानेबाजी का हुनर निखारने के लिए जी-जान से मेहनत करता रहा। इसके लिए छत्रपति शिवाजी स्टेडियम में गगन नारंग फॉर ग्लोरी कोचिंग में दाखिला लेकर प्रख्यात शूटर गगन नारंग से निशानेबाजी की बारीकियां सीखीं। पांच माह का प्रशिक्षण लेकर फिर दिल्ली के करणी सिंह शूटिंग रेंज फिर क्रासबो शूटिंग की कोचिंग शुरू कर दी।
निशानेबाजी में पारंगत होकर अर्चित ने चैम्पियन शिप में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। नेशनल स्तर पर .177 एयर राइफल तथा 0.22 बोर में स्टेट लेबिल पर अपनी पहचान बनाने के बाद वह आगे बढ़ते चले गए। कंबोडिया में 20 जनवरी को आयोजित क्रासबो शूटिंग चैम्पियन शिप में अचूक निशानेबाजी का प्रदर्शन करते हुए दो बार सोने पर निशाना साधा। दो गोल्ड मेडल जीतकर विश्व में भारत का सम्मान बढ़ाने के बाद 24 फरवरी को गाजियाबाद में क्रासबो शूटिंग एसोसिएशन आफ इंडिया द्वारा आयोजित आठवीं नेशनल शूटिंग में सबसे अधिक स्कोर बनाकर इस चैम्पियनशिप को अपने नाम कर लिया। यह चैम्पियनशिन अपने नाम करते ही अर्चित ने 26 मई को कनाडा में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की ओर से क्रासबो शूटिंग की टीम का अर्चित प्रतिनिधित्व करेंगे। चार गोल्ड मेडल जीतकर व एक चैम्पियनशिप में विजय पताका फहराने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज अर्चित ने अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पद हासिल करने का लक्ष्य बना लिया है।
क्या है क्रासबो
क्रासबो एक अलग तरह का धनुष है। यह चलती तो राइफ ल की तरह है लेकिन उसमें से गोली के बजाय तीर निकलकर लक्ष्य को भेदता है। विशेष तौर पर क्रासबो एशियन गेम माना जाता है।