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Lucknow News: कागजों में करोड़ों पौधे, जमीनी हकीकत में सूखी कलमें

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पौधे सूखे।
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लखनऊ। हर साल होने वाले पौधरोपण अभियानों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग होती है। कागजों में करोड़ों पौधे रोपने के आंकड़े दर्ज किए जाते हैं, मगर अभियान के बाद उनका रख-रखाव और निगरानी लगभग शून्य रह जाती है। वन विभाग समेत अन्य महकमों की तैयारी और उत्सुकता केवल अभियान के दिन तक ही सीमित रहती है। अधिकांश स्थानों पर पौधरोपण के बाद पलटकर देखने तक की जहमत नहीं उठाई जाती, जिसके चलते बड़ी संख्या में पौधे सूख जाते हैं।
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ऐसी ही स्थिति हाल ही में लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में बनाए गए त्रिवेणी वन में देखने को मिली। यहां उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 11 दिन पहले पीपल, बरगद और पाकड़ के पौधे लगाकर अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो हेक्टेयर में कुल 2700 फलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाए गए, साथ ही 2000 छोटे पौधे सजावट के लिए भी रोपे गए। शुरुआत में संरक्षण और संवर्धन की बातें जरूर हुईं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह प्रतिबद्धता ठंडी पड़ गई।

मौके पर दो स्थानों पर 100 से अधिक सूखे पौधों के ढेर अब भी पड़े हैं। वहीं, पहले से रोपे गए कई पौधे भी मुरझा चुके हैं। यह स्थिति बरसात के सीजन की है। जब वन विभाग की हालत यह है, तो अन्य विभागों की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं।
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11 दिन पहले चला था अभियान

एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत बीते नौ जुलाई को प्रदेश में 37 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया था। लखनऊ में 41.42 लाख पौधे रोपे जाने की बात सामने आई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लखनऊ से अभियान की शुरुआत की थी।

आंकड़ों की हकीकत

वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में पिछले तीन साल में 1.13 करोड़ पौधे रोपे गए। वर्ष 2022-23 में 37,63,108, 2023-24 में 34,44,328 और 2024-25 में 41,42,796 पौधे लगाए गए। इसमें वन महकमे ने क्रमश: 13,73,708, 9,54,186 और 15,31,578 पौधे रोपे। शेष पौधे ग्राम विकास, स्वास्थ्य, नगर निगम, आवास विकास समेत अन्य विभागों ने लगाए।

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Iपौधरोपण की हर साल जांच कराई जाती है। वन विभाग के पौधरोपण की रेंजर की अगुवाई में टीम निगरानी करती है। वहीं अन्य विभागों से भी पौधरोपण का सत्यापन कराया जाता है, जिसमें करीब 95 फीसदी पौधे जीवित मिलते हैं।I
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I- शितांशु पांडेय, प्रभागीय वनाधिकारीI

पौधे सूखे।

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