विदेश से कंप्यूटर पार्ट्स के नाम पर हथियारों के पुर्जे मंगाकर असलहा तैयार कर बेचने के मामले में एटीएस द्वारा अभियोजन चलाने के लिए शासन से अनुमति लिए बिना चार्जशीट दाखिल करने पर एसीजेएम बालकृष्ण एन. रंजन ने धाराओं में संशोधन किया है।
एसीजेएम ने राज्य के खिलाफ युद्ध के लिए हथियार एकत्र करने और आर्म्स एक्ट की धाराओं में संशोधन करते हुए आरोपी को सिर्फ धोखाधड़ी और कूट रचना की धाराओं में जेल भेजने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी। इससे पहले आरोपी खालिद को जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया।
कोर्ट में आरोपी के वकील ने एटीएस द्वारा दाखिल चार्जशीट को चुनौती देते हुए कहा गया कि विवेचक ने अधूरी विवेचना के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है।
कहा गया कि विवेचक ने राज्य के खिलाफ युद्ध करने के लिए हथियार जुटाने और आर्म्स एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की है, परंतु इन दोनों ही धाराओं में अभियोजन चलाये जाने के लिए शासन से अनुमति नहीं ली है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवेचक ने बताया है कि आरोपियों के खिलाफ विवेचना चल रही है तथा अभियोग चलाए जाने के लिए शासन से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। चूंकि अभी तक अनुमति नहीं मिली है इसलिए लिहाजा धाराओं में संशोधन किया जा रहा है।
गौरतलब है कि विदेशों से हथियारों के कलपुर्जों को तस्करी के जरिए भारत में मंगाकर हथियार बनाने के बाद बेचने के मामले में एटीएस ने 17 अप्रैल को मो. खालिद को गिरफ्तार किया था।
इस मामले में एटीएस ने एल्विन डीसा, गुरुशरण सिंह, जुनैद, कल्लू शर्मा तथा विमल विश्वकर्मा को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। आरोपी गुरुशरण को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई जबकि शेष आरोपी जेल में है।