शादी के बाद अंशू व मंथन का जन्म हुआ। इसके कुछ समय बाद आशा बहू सुनीता व मुकेश में मनमुटाव हो गया। वह छोटे बेटे मंथन को लेकर अपने मायके तारापुर चली गई थी, जबकि बड़ा बेटा अंशू पिता के साथ रह रहा था। पांच साल बाद लोगों व रिश्तेदारों के प्रयास से दोनों में सुलह हुई और सुनीता अपने ससुराल आकर रहने लगी, लेकिन सुलह होने के बाद भी सुनीता के दिल में पति के लिए प्रेम नहीं जागा और उसने 20 दिन में ही अपने हाथों से ही अपनी मांग उजाड़ दी।
मृतक मुकेश के बड़े बेटे अंशू का कहना है कि मां ने उसे खेलने के लिए बाहर भेजकर कहा कि कोई तुम्हारे पिता के बारे में पूछे तो कह देना वह घर पर सो रहे हैं। अंशू बोला कि मां ने धमकाया था कि पिता की हत्या के बारे में किसी को बताया तो तुम्हे और तुम्हारे भाई को तुम्हारे पिता की तरह मार कर कुएं में फेंक दूंगी। इसी वजह से अंशू ने कुछ नहीं बताया। मां की धमकी अंशू के चेहरे पर साफ झलक रही है।
मृतक मुकेश के भाई मनोज का कहना है कि वह दिल्ली में था। उसे 27 सितंबर की रात को गांव के एक लड़के ने फोन करके बताया कि मुकेश के घर में कुछ गड़बड़ है। मुकेश का सुबह से पता नहीं है। सुनीता ने भी फोन करने पर गुमराह किया। बताया कि तुम्हारा भाई 10 हजार रुपये लेकर कहीं चला गया है।
जायस कोतवाली प्रभारी रवींद्र सिंह ने बताया कि महिला ने ही अपने पति की सात सौ रुपये के लिए हत्या की और शव को कुंए में छिपा दिया। शव बरामद करके पीएम के लिए भेजा गया है। महिला को भी पकड़ लिया गया है। पूछताछ की जा रही है। केस दर्ज कर लिया गया है।