टेरर फंडिंग का पहला मामला भले ही यूपी से सामने आया हो, लेकिन हकीकत है कि पिछले कुछ समय से यहां आतंकियों की मदद करने वाले बढ़े हैं। पिछले महीने एटीएस ने कश्मीर में आतंकियों की मदद करने के आरोप में गाजीपुर निवासी शेख अली अकबर को लखनऊ से गिरफ्तार किया था।
कई आतंकियों के व्हाट्स एप ग्रुप से जुड़े अकबर को आतंकियों के लिए असलहे मुहैया कराने थे, पर उसके पहले ही वह एटीएस के हत्थे चढ़ गया। इसी तरह प्रतापगढ़ से भी एक युवक को उठाया गया, जबकि एनआईए ने बांदा के एक मदरसे में तीन दिन तक छानबीन की।
वहीं, वेस्ट यूपी से अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया था। बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों से पिछले दिनों एटीएस ने गिरफ्तारियां की थीं। आईएसआई एजेंट के लिए जासूसी करने के आरोप में पिछले साल फैजाबाद से एक युवक को दबोचा गया था।
उसे भी सरहद पार से फंडिंग होती थी। एटीएस के आईजी असीम अरुण बताते हैं कि पिछले साल सिम बाक्स के जरिए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ होने से इन नेटवर्क के बारे में जानकारी मिलने लगी थी।
इसके बाद से कई नेटवर्क एटीएस के निशाने पर थे। इनमें आतंकी कनेक्शन सामने नहीं आने पर उन्हें जिला पुलिस के हवाले कर दिया गया। जिन मामलों में सरहद पार से साजिश नजर आई उन पर केस दर्ज कर जांच कर गिरफ्तारियां की। पिछले एक डेढ़ साल में बड़ी संख्या में आतंकियों के मददगार पकड़े गए हैं।