सूत्रों की मानें तो अब तक की जांच में ऐसे कई खातों के बारे में जानकारी मिली है जो फर्जी आईडी पर ऑनलाइन खुलवाए गए। इन खातों के खुलने के चंद मिनट बाद ही उनमें डेढ़ से दो लाख रुपये आ जाते थे और यह पैसे पल भर में कार्डलेस ट्रांजक्शन के जरिये निकाल लिए जाते थे। ऐसी करीब 45-50 लाख की लेन-देन की जानकारी सामने आई है। एटीएस का कहना है कि शनिवार व रविवार के कारण बैंकों से और अधिक जानकारी नहीं मिल पाई है। यह लेन-देन और बड़ा भी हो सकता है।
पैसों के इस्तेमाल का पता लगाना बड़ी चुनौती
एटीएस के लिए बड़ी चुनौती यह है कि वह पता लगाए कि पैसों का इस्तेमाल कहां हो रहा था और वे कहां से आ रहे थे। इसमें किसी तरह के हवाला कारोबार या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तो नहीं है? फिलहाल जांच एजेंसी पुख्ता सुबूत इकट्ठा कर रही है।
पकड़े गए आठ संभल के
मामले में गिरफ्तार आठ आरोपी संभल के हैं। इनमें से प्रेम सिंह मूल रूप से मुरादाबाद का है, लेकिन रहता संभल में है। जबकि अंशुल अमरोहा का रहने वाला है। वहीं, एटीएस की नोएडा यूनिट ने जिन अन्य 5 लोगों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है, उन्हें लखनऊ लाया जा रहा है। सभी को रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ की जाएगी और पूरे नेटवर्क के बारे में पड़ताल की जाएगी।
20 का सिम 260 में बेचा
एटीएस ने यूपी से जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें प्रेम सिंह, मोहम्मद फहीम, सैमुल हसन, हरिओम अरोड़ा, चंद्र किशोर, अंशुल कुमार सक्सेना, तरुण सूर्या, पीयूष वाष्र्णेय और प्रशांत गुप्ता हैं। अकेले प्रेम सिंह ने दिल्ली में 1500 प्री एक्टिवेटेड सिम 260 रुपये की दर से बेचे। जबकि सिमकार्ड की कीमत 20 रुपये थी। ये सिम विदेशी नागरिकों को भी दिए गए।