निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने वाली टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड व उससे जुड़ी कंपनियों के सीईओ व निदेशकों की तलाश में विभूति खंड पुलिस ने सोमवार रात कई स्थानों पर दबिश दी।
एमडी की गिरफ्तारी की भनक लगते ही अन्य आरोपी अपना मोबाइल बंद करके अंडरग्राउंड हो चुके थे। इस बीच दो और निवेशकों ने विभूति खंड थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
मैग्नम फ्रॉड की तरह एसएसपी ने टिस्का के खिलाफ दर्ज मुकदमों की तफ्तीश के लिए सीओ गोमती नगर के नेतृत्व में दो इंस्पेक्टर व एक एसएसआई की टीम गठित की है।
एसएसपी जे रविंदर गौड ने बताया कि निवेशकों के लाखों रुपये हड़पने के मामले में सोमवार देर शाम तहसील के पास से गिरफ्तार टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के एमडी राजेश राठौर से गहन पूछताछ हुई है।
इसी के साथ पुलिस टीम ने कंपनी के सीईओ मोहम्मद नदीम व अन्य आरोपियों की तलाश में विभिन्न स्थानों पर दबिश दी लेकिन कोई हाथ नहीं आया।
इस बीच अलीगंज क्षेत्र के अफसर हुसैन की पत्नी तहरीम फातिमा ने टिस्का कंपनी के राजेश राठौर,रमा देवी राठौर,मो नदीम,वीर बहादुर सिंह,खलील व मो. आतिफ पर 3.70 लाख रुपये हड़पने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
इसी तरह चौक के हेल्थ स्क्वॉयर निवासी अहमद सारिक अलवी ने पांच लाख रुपये हड़पने व अन्य धाराओं के तहत मुकदमा लिखाया है।
यूपी डेस्को के टेंडर की जांच
पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि खुद को एक मंत्री के बेटे व यूपी डेस्को के एमडी का करीबी बताने वाले मास्टर माइंड नदीम द्वारा दो सौ करोड़ का टेंडर हथियाने की भी जांच हो रही है।
पड़ताल में पता चला है कि टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड समेत पांच कंपनियां बनाकर सैकड़ों लोगों से लाखों का निवेश कराया गया।
तगादे पर टालमटोल कर रहे नदीम ने अगले महीने निवेशकों को उनकी रकम का कुछ हिस्सा लौटाने की योजना बनाई थी।
उनकी कंपनी रेडियन वेव टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में दस जनवरी को सौ करोड़ रुपये आने थे। दरअसल जालसाजों का इरादा अभी और माल बटोरने का था,लेकिन मुकदमे दर्ज होने से उनकी योजना पर पानी फिर गया।
गैर ही नहीं अपनों को भी ठगा
टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड व उससे जुड़ी कंपनियों की ठगी का शिकार बने निवेशकों द्वारा जो रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही हैं उनमें कंपनी के निदेशकों व अधिकारियों के साथ एजेंटों को भी नामजद कराया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि कंपनी के 1700 रजिस्टर्ड एजेंट थे। सभी से मोटी रकम निवेश कराकर एजेंट बनाया गया। इसके बाद अन्य लोगों से निवेश कराने पर मोटा कमीशन दिया जाता था।
इसके साथ मुनाफे के झांसे में आए एजेंट कमीशन के रूप में कमाई गई रकम भी कंपनी में लगा देते थे।
इस तरह जालसाजों ने अपने एजेंटों को भी नहीं बख्शा। ठगी का शिकार बने एजेंट विभिन्न मुकदमों में जालसाजों के साथ नामजद आरोपी हैं।