मैग्नम ग्रुप और टिस्का ने लाखों,करोड़ों नहीं बल्कि अरबों का चूना लगाया था। लुभावनी योजनाओं के झांसे में आए सैकड़ों निवेशकों ने जालसाजों को लाखों रुपये दे डाले।
दोनों कंपनियों का मास्टर माइंड एक ही व्यक्ति होने की आशंका के चलते पुलिस ने मैग्नम के ऑडिटर को नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया है।
खास बात यह है कि जालसाजों ने पुलिस से साठगांठ करके अपना कारोबार फैलाया था। मामला तूल पकड़ने पर मुकदमे दर्ज करके धरपकड़ शुरू की लेकिन तब तक करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए जा चुके थे।
गुडंबा क्षेत्र में संचालित मैग्नम ग्रुप के खिलाफ 75 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। उसके तीनों निदेशक अरुण चतुर्वेदी,वरुण चतुर्वेदी और नीलम चतुर्वेदी के साथ रमापति चौबे भी जेल में है।
जालसाजों से साठगांठ के चलते पुलिस कार्रवाई की पल-पल की रिपोर्ट देने वाला कांस्टेबल रणधीर सिंह निलंबित हो चुका है। उसके खिलाफ जांच भी चल रही है।
निदेशकों से लेनदेन संबंधी वार्तालाप की सीडी सामने आने पर एसएसपी ने गुडंबा थानाध्यक्ष राम प्रसाद यादव को लाइन हाजिर कर दिया है।
अभी मैग्नम ग्रुप से जुड़े अन्य लोगों की धरपकड़ व साठगांठ के आरोपी अन्य पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
इंस्पेक्टर समेत पांच दरोगाओं की टीम मुकदमों की तफ्तीश कर रही है तो राजपत्रित अधिकारी द्वारा जालसाजों व पुलिस के गठबंधन की जांच की जा रही है।
मैग्नम ग्रुप के खिलाफ चल रही कार्रवाई किसी अंजाम तक पहुंचती कि विभूति खंड क्षेत्र में संचालित टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड का घोटाला उजागर हुआ।
नई दिल्ली के चार व्यापारियों की शिकायत को कई दिन तक जांच के बहाने टालती रही पुलिस ने चार दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज की।
इसके बाद शिकायतों का सिलसिला चल पड़ा। अब तक 17 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसमें करोड़ों का घोटाला सामने आया है।
टिस्का फ्रॉड उजागर होने पर पुलिस के साथ निवेशकों ने भी कंपनी के संचालकों की तलाश शुरू की और कंपनी के एमडी राजेश राठौर को सोमवार शाम तहसील सदर के पास वकीलों ने पकड़ लिया।
राजेश व कुछ एजेंटों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि करोड़ों के फ्रॉड का मास्टरमाइंड मोहम्मद नदीम है। वह मैग्नम ग्रुप में भी पार्टनर था। इतना ही नहीं उसके खिलाफ दर्ज एक मुकदमे में गुडंबा पुलिस की मेहरबानी भी सामने आई।
जांच टीम में शामिल एसएसआई त्रिभुवन प्रसाद वर्मा ने बताया कि ऑडिटर से पूछताछ में तमाम राज उजागर होने की उम्मीद है।
अब तक पता चला है कि मास्टर माइंड मोहम्मद नदीम ने मैग्नम ग्रुप में पर्दे के पीछे से काम किया था। उसने न तो कहीं अपने नाम का इस्तेमाल किया और न ही मुनाफे का चेक लिया। वह नगद रुपये लेता था।
खास बात यह है कि मोटे लाभ के लालच में दोनों कंपनियों में लाखों का निवेश करने वाले लोग अब अपनी रकम वापस पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
पुलिस अफसरों का कहना है कि मैग्नम व टिस्का के साथ उससे जुड़ी कंपनियों के खाते सीज कर दिए गए हैं। कुछ दिनों पहले कोर्ट ने हजरतगंज क्षेत्र से भागी दो कंपनियों के निवेशकों को रकम लौटाने के आदेश दिए थे।