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शिकंजे में आए मैग्नम ग्रुप के दोनों संचालक

Wed, 16 Oct 2013 11:13 AM IST
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
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करोड़ों की हेराफेरी के आरोपी मैग्नम ग्रुप के संचालक भाई-बहन को सोमवार दोपहर गुडंबा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अरसे से फरार दोनों संचालकों की पुलिस को 70 मुकदमों में तलाश थी।
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सीओ गोमतीनगर विद्यासागर मिश्रा ने बताया कि गुडंबा थाने की टीम ने मंगलवार दोपहर पुरानी जेल रोड पर घेराबंदी करके मैग्नम ग्रुप के संचालक वरुण चतुर्वेदी व नीलम चतुर्वेदी को गिरफ्तार कर लिया है।

दोनों से जालसाजी, हेराफेरी व अन्य धाराओं के तहत गुडंबा थाने में दर्ज 70 मुकदमों के बारे में पूछताछ करने के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

कोर्ट ने दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी होते ही विवेचक टीपी वर्मा व राजेंद्र सिंह ने तीन मुकदमों में पुलिस कस्टडी रिमांड की कोर्ट में अर्जी प्रस्तुत की।
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गौरतलब है कि गुडंबा थाना क्षेत्र के जानकी प्लाजा में संचालित मैग्नम फाइनेंशियल सर्विसेज, मैग्नम इंफडेवलपर्स व मैग्नम फाइनेंशियल सर्विसेज व फिनकार्प होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के तहत लुभावनी योजनाओं का झांसा देकर संचालकों ने लोगों से करोड़ों रुपये वसूले और रकम हड़प ली।

तगादा करने पर धमकाने के साथ कई लोगों को सुरक्षा गार्डों की मदद से पीटा। वहीं काफी समय तक टालमटोल करने के बाद हरकत में आई पुलिस ने मुकदमे दर्ज करने शुरू किए तो महज कुछ ही दिनों में मुकदमों की संख्या 70 हो गई।

विवेचना पर अंगुली उठते देख एसएसपी ने सीओ गोमतीनगर के नेतृत्व में विभिन्न थानों के पांच दरोगाओं की टीम गठित करके मुकदमों की तफ्तीश शुरू कराई थी।

कुर्की की तैयारी में थी पुलिस
विवेचक टीपी वर्मा ने बताया कि मुख्य आरोपी अरुण चतुर्वेदी की गिरफ्तारी के बाद से वरुण व नीलम फरार थे।

काफी तलाश के बावजूद कुछ भी पता न चलने पर पुलिस ने कोर्ट से इजाजत लेकर मैग्नम ग्रुप के ऑफिस सील करके नोटिस चस्पा करने के साथ वरुण व नीलम को सीओ गोमतीनगर के समक्ष प्रस्तुत होने के आदेश दिए थे।
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इस पर भी कुछ न होते देख पुलिस ने कुर्की की तैयारी की थी। इस बीच दोनों को आज गिरफ्तार कर लिया गया।

खुद को बेकसूर बताती रही नीलम
मैग्नम ग्रुप की संचालक नीलम चतुर्वेदी ने करोड़ों हेराफेरी मामले में खुद को बेकसूर बताते हुए कोई जानकारी न होने की बात कही।

पर, सीओ गोमतीनगर के नेतृत्व में 70 मुकदमों की तफ्तीश कर रही विभिन्न थानों के पांच सबइंस्पेक्टरों की टीम के सवालों के आगे निरुत्तर हो गई।

आखिरकार उसने माना कि निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने में अपने दोनों भाइयों अरुण व वरुण के साथ वह भी भागीदार है।

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