रेहरा बाजार-बलरामपुर। जोगियावीर रजक टोला में रविवार रात एक ही परिवार में ट्रिपल मर्डर से क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव में दहशत का माहौल है। घटना को लेकर गांव से लेकर क्षेत्र में चर्चा का बाजार गर्म है। मृतक के रिश्तेदारों का पहुंचना लगातार जारी है। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव जब गांव पहुंचे तो परिजनों व रिश्तेदारों में कोहराम मच गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच तीनों शवों का दाह संस्कार करा दिया है। घटना के कारणों तथा आरोपियों की तलाश में धर पकड़ जारी है। पुलिस शक के आधार पर लोगों को हिरासत में ले रही है। दहशत के चलते कुछ लोग गांव छोड़कर चले गए हैं।
जमीनी विवाद की संभावना जाताई जा रही है
जोगियावीर निवासी जगराम राजभर, उनके बेटे राजू राजभर तथा बेटी लाली की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। घटना में घायल राजू की पत्नी निर्मला की हालत अभी कुछ बता पाने की नहीं है। परिवार का एक अन्य बेटा मुम्बई में परिवार के साथ रहकर रोजी-रोटी कमा रहा है। घटना के पीछे मृतक की एक विवाहित बेटी ने छोटे भाई के संबंधों को लेकर करीब पांच साल पूर्व दो परिवारों के बीच हुए तनाव को घटना का कारण बता रही है लेकिन पुलिस उसके आरोप को अभी सच मानने को तैयार नहीं है। पुलिस का कहना है कि पांच साल पहले जो विवाद पैदा हुआ था वह करीब-करीब सामान्य हो गया है। घटना के पीछे जमीनी विवाद की भी संभावना जताई जा रही है। इस विवाद का खुलासा परिवार का कोई सदस्य या घायल बहू ही कर सकती है जो कि अभी कुछ बोलने की हालत में नहीं है। घटना में घायल होकर जान बचाकर भागी बहू आरोपियों के बारे में कोई अहम सुराग दे सकती है। ट्रिपल मर्डर पुलिस के लिए भी अनसुलझी पहेली बना हुआ है। शक के आधार पर पुलिस ने 9 लोगों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए सभी लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है। एसपी अनुराग आर्य ने बताया कि घटना के खुलासे के लिए पुलिस की तीन टीम गठित की गई है। छानबीन व पूछताछ के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। शीघ्र ही घटना के कारणों का खुलासा करते हुए आरोपियों को बेनकाब किया जाएगा।
ग्रामीणों की गोद में रोता रहा मासूम
8 माह के दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर घायल होने के बाद भागी बहू निर्मला की जान तो डाक्टरों ने बचा ली है। संयुक्त जिला अस्पताल में भर्ती निर्मला का दुधमुंहा बच्चा दोपहर तक मां की गोद में जाने के लिए रो रहा था। गांव की कुछ महिलाएं बच्चे को छुप कराने की कोशिश कर रही थी। 11 बजे के करीब निर्मला के पिता व बच्चे के नाना फकीरी हास्पिटल पहुंचे तो बेटी को देखने के बाद वह नाती को ढूंढने लगे। गांव की महिलाओं ने रोते हुए बच्चे को फकीरी की गोद में डाल दिया। नाना की गोद में पहुंचते ही बच्चा चुप हो गया। फकीरी ने बताया कि उनकी बेटी अभी तीन दिन पहले ही मायके से ससुराल आई है।