पांच करोड़ रुपये के एक टेंडर के लिए मंडलायुक्त कार्यालय से लेकर एलडीए के मुख्य अभियंता कार्यालय तक बुधवार को जमकर हंगामा हुआ।
आरोप है कि एक रसूखदार ठेकेदार ने बाहुबल से दूसरों को टेंडर डालने से रोकने का भरसक प्रयास किया।
इस प्रकरण में कमिश्नर ऑफिस पर ज्यादा हंगामा हुआ। यहां तक कि एक ठेकेदार को पीटने के साथ ही रिवॉल्वर भी तान दी गई।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर एक को गिरफ्तार कर लिया है। बाद में कमिश्नर के आदेश पर सभी के टेंडर डलवा बॉक्स को सील किया गया।
इसी निविदा को लेकर एलडीए में भी बवाल हुआ। यहां एक ठेकेदार के समर्थक 50 से अधिक युवकों ने टेंडर नहीं पड़ने दिए।
एलडीए में एक बार फिर से टेंडर हथियाने के लिए खुलकर गुंडागर्दी हुई। पांच करोड़ रुपये की लागत से गोमती नगर विस्तार में एक नाले का निर्माण होना है।
सत्ता का नजदीकी बताया जाने वाला एक ठेकेदार इसे हथियाने में लगा है। जानकारों का कहना है कि ठेकेदार के प्रभाव से ही यह टेंडर एक बार स्थगित भी किया जा चुका है।
इसके बाद में नए सिरे से प्रक्रिया का आगाज हुआ। टेंडर डालने का बुधवार को आखिरी दिन था। दोपहर 3:00 बजे तक का समय इसके लिए निर्धारित था।
करीब दो बजे कमिश्नर ऑफिस में ठेकेदार दिलीप राणा ने जैसे ही बॉक्स में टेंडर डालने की कोशिश की, गुर्गे उस पर टूट पड़े।
दिलीप ने कमिश्नर ऑफिस में घुसकर खुद को बचाया। मारपीट का मामला बढ़ता देख यहां पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और प्रमोद यादव को दबोचा।
बाद में इसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने और हंगामा करने आदि की शिकायत पर केस दर्ज कराया गया।
मामले की जानकारी पर कमिश्नर संजीव शरण ने अधिकारियों को पुलिस की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से टेंडर कराने के आदेश दिए।
इसके बाद पुलिस ने हंगामा करने वाले कुछ लोगों को कस्टडी में लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद बॉक्स सील कर एलडीए भेज दिया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कमिश्नर संजीव शरण ने परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही हालात संभालने के लिए अपर आयुक्त ओपी पाठक की सराहना भी की है।
दूसरी ओर, इसी समय प्राधिकरण में भी इसी टेंडर को लेकर हंगामे की स्थिति बनी रही। 25 से 30 वर्ष उम्र के करीब 50 युवक मुख्य अभियंता ऑफिस के बाहर डटे रहे।
यहां सिर्फ उसी ठेकेदार का टेंडर पड़ा, जिसके गुर्गे तैनात थे। जबकि, बाकियों को डरा-धमकाकर भगा दिया गया।
तीन बजे के बाद ऑफिस पहुंचे मुख्य अभियंता डीआर यादव से विवेक सिंह नामक ठेकेदार ने शिकायत की। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि कमिश्नर ऑफिस में टेंडर डाल सकते थे।