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सिमी आतंकियों पर थोपी जा रही है एटीएम लूट

Tue, 07 Apr 2015 06:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ के डालीगंज में हुई एटीएम लूट और हत्या के मामले में पुलिस की नई थ्योरी सामने आ रही है।
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डालीगंज में दिनदहाड़े तीन लोगों की हत्या कर एटीएम से 50.50 लाख रुपये की लूट हुई थी।

तेलंगाना पुलिस को शक है कि उन्होंने मुठभेड़ में जिन आतंकयों को मारा है वे इस लूट के आरोपी हो सकते हैं।

मुठभेड़ में मारे जाने से जहां लखनऊ के पुलिस अफसर इत्तिफाक रख रहे हैं, वहीं आला पुलिस अफसरों ने इस पर संशय जताया है।

डीजीपी एके जैन ने तेलंगाना पुलिस की इस आशंका को निर्मूल बताया कि वहां मुठभेड़ में जिन दो सिमी आतंकियों एजाजुद्दीन और असलम उर्फ बिलाल को मारा गया है, उन्होंने ही लखनऊ में लूट की थी।
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ये है आला अफसरों का कहना...

इस मामले पर डीजीपी एके जैन ने कहा-चूंकि वे दोनों आतंकी मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से भागे थे। इसलिए घटना की जानकारी मिलते ही मैंने एमपी के डीजीपी, आईजी और खंडवा एसएसपी से बात की।

किसी से भी बात में यह साबित नहीं हो रहा कि उन्हीं आतंकियों ने लखनऊ में लूटपाट की थी।

तेलंगाना पुलिस ने भी तो सिर्फ संदेह ही जताया है। हमने एएसपी क्राइम को वारदात स्थल नलगोंडा (तेलंगाना) भेजा है।

एडीजी कानून-व्यवस्था से लेकर एटीएस व एसटीएफ के अधिकारी भी तेलंगाना पुलिस की कहानी पर शक जता रहे हैं।

जबकि नाकामी से डरे राज्य खुफिया विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से कतराते रहे हैं।

अगर तेलंगाना पुलिस की शंका सही हुई तो यह साबित हो जाएगा कि यूपी से लेकर केंद्र व अन्य राज्यों की एजेंसियां जिनकी तलाश में जुटी थीं, वे लखनऊ में न सिर्फ शरण लिए हुए थे, बल्कि कई दिन की रेकी कर सनसनीखेज लूट करने में भी कामयाब रहे।

सुबूत जुटाने तेलंगाना पहुंची लखनऊ पुलिस

तेलंगाना में मुठभेड़ में मारे गए दो सिमी आतंकियों द्वारा डालीगंज में एटीएम कांड को अंजाम देने की आला अफसर भले ही पुष्टि न कर रहे हों, लेकिन लखनऊ पुलिस ऐसे आधार की तलाश में तेलंगाना पहुंची है।
 
वहीं दोनों आतंकियों का लखनऊ से कनेक्शन जोड़ने के लिए चौक सर्किल में मुखबिरों का जाल फैलाया गया है।

लखनऊ पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि तेलंगाना के डीजीपी अनुराग शर्मा के बयान के बाद एएसपी क्राइम दिनेश कुमार सिंह व लूटकांड की तफ्तीश कर रहे एसओ हसनगंज धीरज सिंह की टीम को नलगोंडा (तेलंगाना) भेजा गया है।

एएसपी दिनेश सिंह का कहना है कि मारे गए दोनों आतंकियों के फोटो का ट्रिपल मर्डर व एटीएम लूटकांड करने वाले बदमाशों के सीसीटीवी फुटेज में हुलिया मेल खा रहा है।

आतंकियों के वजीरगंज के गोलागंज से 30 मई 2011 को एटीएस द्वारा पकड़े जाने की जानकारी मिली है।

खंगाले जा रहे हैं पुराने रिकॉर्ड

एएसपी ट्रांसगोमती दिनेश यादव ने जानकारी दी कि ट्रिपल मर्डर व 50.50 लाख की लूट के दौरान बदमाशों ने नए कपड़े पहने थे, मुठभेड़ में मारे आतंकियों के तन पर नए व ब्रांडेड कपड़े मिले हैं।

दोनों आतंकियों का लखनऊ कनेक्शन साबित करने के लिए चार साल पहले गोलागंज इलाके से उनकी गिरफ्तारी की अपुष्ट सूचना पर पुराने रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।

वजीरगंज इलाके में मुखबिरों का जाल फैलाने के साथ खुफियातंत्र को भी सक्रिय किया गया है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम के बाद भी संगीन वारदात के खुलासे में नाकाम रही लखनऊ पुलिस का पूरा जोर तेलंगाना पुलिस की थ्योरी को सही साबित करने पर है।

इससे रकम बरामदगी व अन्य साक्ष्य एकत्र करने का झंझट खत्म हो जाएगा।
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आधार मिलने पर बंद होगी फाइल

एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि एएसपी क्राइम व एसओ हसनगंज को तेलंगाना में ढेर दोनों आतंकियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने, उनके मोबाइल का कॉल डिटेल व लोकेशन खंगालने व तेलंगाना की जांच एजेंसियों से उनके बारे में जानकारी करके नतीजा निकालने के आदेश दिए गए हैं।

छानबीन की जा रही है कि फरवरी में दोनों आतंकी कहां थे और किन लोगों से बात की थी? दोनों के मोबाइल की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।

उनके द्वारा ही ट्रिपल मर्डर व लूट अंजाम देने के पुख्ता सुबूत हाथ लगने पर फाइल बंद कर दी जाएगी।

यदि वारदात में अन्य बदमाशों के हाथ या दोनों आतंकियों के साथ किसी और की भी संलिप्तता का पता चला तो उसकी तलाश के साथ रकम बरामदगी के लिए तफ्तीश जारी रहेगी।
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