केजीएमयू के 2013 बैच के सात मेडिकोज को मध्यप्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स की टीम ने उठा लिया। व्यापम घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ को इस बात की आशंका है कि इन सातों स्टूडेंट के दाखिले में भी कहीं गड़बड़ी हुई है।
टीजी हॉस्टल में रहने वाले इन स्टूडेंट को जब एसटीएफ की टीम अपने साथ ले गई उसके बाद से हड़कंप मचा हुआ है। केजीएमयू पहुची एसटीएफ की टीम ने कुलपति की अनुमति के बाद सातों लड़कों को अपने साथ लेकर चली गई।
एसटीएफ टीम का दावा था कि पूछताछ के बाद इन लड़कों को छोड़ दिया जाएगा। मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाले की जांच प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज केजीएमयू में पहुंच गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक व्यापम घोटाले की जांच में मध्यप्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स टीम को सुराग लगा है कि केजीएमयू के कुछ स्टूडेंट इस पूरे प्रकरण में शामिल हो सकते हैं।
इसी को आधार बनाकर बृहस्पतिवार को मध्यप्रदेश एसटीएफ की टीम केजीएमयू पहुंची। कुलपति को मामले की जानकारी देने के बाद टीजी हॉस्टल में रहने वाले सात छात्रों से टीम ने प्रारंभिक पूछताछ की उसके बाद कुलपति से अनुमति लेने के बाद अपने साथ ले गई।
कई बड़े मामलों से उठेगा पर्दा
केजीएमयू पहुंची मध्यप्रदेश की एसटीएफ टीम के बाद हड़कंप मचा हुआ है। केजीएमयू सूत्रों का कहना है कि अगर पूछताछ में छात्रों ने कुछ राज उगला तो कई बड़े मामलों से पर्दा उठ जाएगा।
मालूम हो कि व्यापम घोटाले के सरगना छात्रों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पास कराने का दावा करने के बाद सॉल्वर मुहैया कराते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। मालूम हो कि इससे पहले भी इलाहाबाद और जालौन समेत अन्य मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों से पूछताछ कर चुकी है।
केजीएमयू के सात मेडिकोज को मध्यप्रदेश एसटीएफ द्वारा उठाए जाने के बाद अब आशंका जताई जाने लगी है कि कहीं इन छात्रों ने सॉलवरों की मदद से तो केजीएमयू में दाखिला नहीं लिया था।
वहीं इस मामले में कुछ लोगों का मानना है कि हो सकता है कि टीम ने जिन मेडिकोज को पूछताछ के लिए उठाया है वो हो सकता है कि दूसरे को परीक्षा में पास कराने के लिए बैठे हों। मालूम हो कि मेडिकल दाखिले में गड़बड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं।
इसी का नतीजा होता है कि सीपीएमटी या शहर में अन्य मेडिकल परीक्षा होने पर केजीएमयू के हॉस्टलर्स को हॉस्टल से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी जाती है। फिलहाल हर कोई मेडिकोज के लौटने का इंतजार कर रहा है जिसके बाद पूरे मामले से तस्वीर साफ हो जाएगी।
क्या है मध्यप्रदेश का व्यापम घोटाला
मध्यप्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल ‘व्यापम’ घोटाला सामने आया था। व्यापम के तहत आयोजित पीएमटी 2012-13 परीक्षा में अनिधकृत रूप से बैठने वाले छात्रों की खोजबीन के लिए दबिश दी थी।
व्यापम घोटाले में नौकरियों में नियुक्ति को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था जिसमें लिखित परीक्षा में गड़बड़ी के अधिक मामले सामने आए थे। सात जुलाई 2013 को घोटाले का पर्दाफाश हुआ तो इसके मुख्य सरगना ग्वालियर निवारी डॉ. जगदीश सागर और उसके सहयोगी झांसी के नीरज पटले, हमीरपुर जिले के राठ निवससी विकल्प सिंह और इटावा के विवेक यादव को गिरफ्तार किया था। मालूम हो कि इस घोटाले के खुलासे के बाद राज्य सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी।
केजीएमयू के कुलपति प्रो. रविकांत ने बताया कि मध्यप्रदेश में व्यापम घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ टीम बृहस्पतिवार को केजीएमयू पहुंची थी। टीम ने छात्रों से पूछताछ के लिए अनुमति मांगी थी जिसके लिए अनुमति दी गई। जांच में सहयोग करना हमारा कर्त्वय है। किसी छात्र के खिलाफ टीम के पास गिरफ्तारी वारंट नहीं था। पूछताछ के बाद स्टूडेंट वापस आ जाएंगे।