फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Girdhari Encounter: एक गोली गिरधारी के सीने में तो एक बाईं जांघ में लगी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई पुष्टि

Mon, 15 Feb 2021 11:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

अजीत हत्याकांड का मुख्य आरोपी व शूटर गिरधारी विश्वकर्मा उर्फ डॉक्टर रविवार देर रात पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस उसे लेकर असलहा बरामद करने खरगापुर निकली थी, जहां मौका पाकर उसने दरोगा पर सिर से वार किया और सरकारी पिस्तौल छीनकर भागने लगा। अन्य पुलिसकर्मियों ने पीछा किया तो फायरिंग कर दी। एसएसआई के दाहिने हाथ में गोली लगी।

विज्ञापन


पुलिस की जवाबी फायरिंग में गिरधारी गंभीर रूप से घायल हो गया। लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस गिरधारी को तीन दिन की कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही थी। पुलिस ने मुठभेड़ वाले इलाके को सील कर दिया है। देर शाम पोस्टमार्टम में गिरधारी को दो गाली लगने की पुष्टि हुई। एक गोली बाएं तरफ सीने में और दूसरी गोली बाएं तरफ जांघ में लगी।

संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक, छह जनवरी को कठौता चौराहे पर मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह की छह शूटरों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। इसमें मुख्य भूमिका वाराणसी के कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर उर्फ लोहार ने निभाई थी। उसने ही शूटरों का इंतजाम किया था।
विज्ञापन


वारदात के बाद वह दिल्ली भाग गया था। 11 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था और 10 फरवरी को लखनऊ की कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। 11 फरवरी को विभूतिखंड पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में कस्टडी रिमांड की अर्जी दी।

12 फरवरी को सुनवाई के दौरान 13 से 16 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए सीजेएम सुशील कुमारी ने रिमांड मंजूर की। शनिवार को कई राउंड पूछताछ की। रविवार देर रात तक पूछताछ के बाद उसने असलहा बरामद कराने के लिए हामी भरी। पुलिस रात करीब 2.30 बजे उसे लेकर खरगापुर को निकली थी।

सहारा अस्पताल के पीछे छीनी दरोगा की पिस्तौल

जेसीपी क्राइम के मुताबिक, गिरधारी की निशानदेही पर इंस्पेक्टर विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह, एसएसआई अनिल सिंह, दरोगा अख्तर सईद उस्मानी व अन्य पुलिसकर्मी थाने से निकले। सहारा अस्पताल के पास पहुंचने के बाद गिरधारी ने दरोगा के चेहरे पर सिर से वार किया।

खून से लथपथ दरोगा के संभलने से पहले गिरधारी ने उनकी पिस्तौल छीन ली और रेलवे लाइन किनारे झाड़ियों में छिपकर भागने लगा। इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने कंट्रोल रूम को सूचना देकर अतिरिक्त पुलिस बल मांगा। इस दौरान एसएसआई अनिल सिंह ने उसे चेतावनी देकर रोका तो गिरधारी ने फायर झोंक दिया। गोली अनिल के दाहिने बाजू पर लगी।

इस पर इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने जवाबी फायर किया तो गिरधारी ने भी गोली चलाई, जो इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। जवाबी फायरिंग में गंभीर रूप से जख्मी गिरधारी को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ में घायल दोनों दरोगा को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना पर जेसीपी अपराध, डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन, एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक सहित कई अधिकारी पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए।

दो दिन की पूछताछ में उगले कई राज

जेसीपी क्राइम के मुताबिक, पूछताछ में गिरधारी ने कई राज उगले थे। कुबूला था कि अजीत की हत्या कुंटू व अखंड सिंह के कहने पर की थी। इसके लिए दोनों से मिलने आजमगढ़ जेल भी गया था। मामले में पूर्वांचल के बाहुबली नेता की भी भूमिका थी। उसने रविवार को अलकनंदा अपार्टमेंट के फ्लैट से मोबाइल भी बरामद कराया था। इसमें मिले एक नंबर पर सिर्फ पांच मोबाइल नंबर सेव थे। इन्हीं नंबरों पर बातचीत हुई थी।

सात महीने पहले लखनऊ में डाला था डेरा
पुलिस के मुताबिक, रिमांड में गिरधारी ने स्वीकारा था कि वह पिछले साल जुलाई में लखनऊ आ गया था। अलकनंदा अपार्टमेंट में अंकुर के फ्लैट में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा। अजीत की हत्या के लिए दो महीने रेकी की। गिरधारी व साथी शूटरों ने अजीत को 25 गोलियां मारी थीं। इस दौरान मोहर सिंह व राहगीर आकाश यादव घायल हुआ था। गैंगवार में गिरधारी के अलावा कुंटू सिंह, अखंड सिंह सहित छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। गैंगवार में पुलिस अभी तक तीन मददगार व एक शूटर को गिरफ्तार कर चुकी है।

दो दिन की पूछताछ में गिरधारी ने उगले थे कई राज

संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक रविवार देर रात मुठभेड़ में ढेर गिरधारी ने दो दिन की पूछताछ में कई राज उगले थे। गिरधारी ने कुबूला था कि अजीत की हत्या कुंटू व अखंड सिंह के कहने पर की थी। इसके लिए दोनों से मिलने आजमगढ़ जेल भी गया था। मामले में पूर्वांचल के बाहुबली नेता की भी भूमिका थी। उसने रविवार को अलकनंदा अपार्टमेंट के फ्लैट से मोबाइल भी बरामद कराया था। इसमें मिले एक नंबर पर सिर्फ पांच मोबाइल नंबर सेव थे। सिर्फ इन्हीं नंबरों पर बातचीत हुई थी।

सात महीने पहले लखनऊ में डाला था डेरा
पुलिस के मुताबिक, रिमांड के दौरान गिरधारी ने स्वीकार था कि वह पिछले साल जुलाई में लखनऊ आ गया था। अलकनंदा अपार्टमेंट में अंकुर के फ्लैट में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा था। अजीत की हत्या के लिए दो महीने तक रेकी की थी। गिरधारी व साथी शूटरों ने अजीत को 25 गोलियां मारी थीं। इस दौरान मोहर सिंह व एक राहगीर आकाश यादव घायल हुआ था। गैंगवार में गिरधारी के अलावा कुंटू सिंह, अखंड सिंह सहित छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। गैंगवार में पुलिस अभी तक तीन मददगार व एक शूटर को गिरफ्तार कर चुकी है।
विज्ञापन

वारदात के बाद दिल्ली भाग गया था गिरधारी

वारदात के बाद गिरधारी दिल्ली भाग गया था। 11 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। 10 फरवरी को लखनऊ के कोर्ट में पेश किया। जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया। 11 फरवरी को विभूतिखंड पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में कस्टडी रिमांड की अर्जी डाली। 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान 13 से 16 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए सीजेएम सुशील कुमारी ने रिमांड मंजूर की। शनिवार को कई राउंड पूछताछ की गई। रविवार देर रात तक पूछताछ के बाद उसने असलहा बरामद कराने के लिए हामी भरी। पुलिस रात करीब 2.30 बजे उसे लेकर खरगापुर के लिए निकली थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें