जेसीपी क्राइम के मुताबिक, गिरधारी की निशानदेही पर इंस्पेक्टर विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह, एसएसआई अनिल सिंह, दरोगा अख्तर सईद उस्मानी व अन्य पुलिसकर्मी थाने से निकले। सहारा अस्पताल के पास पहुंचने के बाद गिरधारी ने दरोगा के चेहरे पर सिर से वार किया।
खून से लथपथ दरोगा के संभलने से पहले गिरधारी ने उनकी पिस्तौल छीन ली और रेलवे लाइन किनारे झाड़ियों में छिपकर भागने लगा। इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने कंट्रोल रूम को सूचना देकर अतिरिक्त पुलिस बल मांगा। इस दौरान एसएसआई अनिल सिंह ने उसे चेतावनी देकर रोका तो गिरधारी ने फायर झोंक दिया। गोली अनिल के दाहिने बाजू पर लगी।
इस पर इंस्पेक्टर चंद्रशेखर सिंह ने जवाबी फायर किया तो गिरधारी ने भी गोली चलाई, जो इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। जवाबी फायरिंग में गंभीर रूप से जख्मी गिरधारी को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ में घायल दोनों दरोगा को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना पर जेसीपी अपराध, डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन, एसीपी विभूतिखंड प्रवीण मलिक सहित कई अधिकारी पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए।
जेसीपी क्राइम के मुताबिक, पूछताछ में गिरधारी ने कई राज उगले थे। कुबूला था कि अजीत की हत्या कुंटू व अखंड सिंह के कहने पर की थी। इसके लिए दोनों से मिलने आजमगढ़ जेल भी गया था। मामले में पूर्वांचल के बाहुबली नेता की भी भूमिका थी। उसने रविवार को अलकनंदा अपार्टमेंट के फ्लैट से मोबाइल भी बरामद कराया था। इसमें मिले एक नंबर पर सिर्फ पांच मोबाइल नंबर सेव थे। इन्हीं नंबरों पर बातचीत हुई थी।
सात महीने पहले लखनऊ में डाला था डेरा
पुलिस के मुताबिक, रिमांड में गिरधारी ने स्वीकारा था कि वह पिछले साल जुलाई में लखनऊ आ गया था। अलकनंदा अपार्टमेंट में अंकुर के फ्लैट में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा। अजीत की हत्या के लिए दो महीने रेकी की। गिरधारी व साथी शूटरों ने अजीत को 25 गोलियां मारी थीं। इस दौरान मोहर सिंह व राहगीर आकाश यादव घायल हुआ था। गैंगवार में गिरधारी के अलावा कुंटू सिंह, अखंड सिंह सहित छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। गैंगवार में पुलिस अभी तक तीन मददगार व एक शूटर को गिरफ्तार कर चुकी है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी के मुताबिक रविवार देर रात मुठभेड़ में ढेर गिरधारी ने दो दिन की पूछताछ में कई राज उगले थे। गिरधारी ने कुबूला था कि अजीत की हत्या कुंटू व अखंड सिंह के कहने पर की थी। इसके लिए दोनों से मिलने आजमगढ़ जेल भी गया था। मामले में पूर्वांचल के बाहुबली नेता की भी भूमिका थी। उसने रविवार को अलकनंदा अपार्टमेंट के फ्लैट से मोबाइल भी बरामद कराया था। इसमें मिले एक नंबर पर सिर्फ पांच मोबाइल नंबर सेव थे। सिर्फ इन्हीं नंबरों पर बातचीत हुई थी।
सात महीने पहले लखनऊ में डाला था डेरा
पुलिस के मुताबिक, रिमांड के दौरान गिरधारी ने स्वीकार था कि वह पिछले साल जुलाई में लखनऊ आ गया था। अलकनंदा अपार्टमेंट में अंकुर के फ्लैट में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने लगा था। अजीत की हत्या के लिए दो महीने तक रेकी की थी। गिरधारी व साथी शूटरों ने अजीत को 25 गोलियां मारी थीं। इस दौरान मोहर सिंह व एक राहगीर आकाश यादव घायल हुआ था। गैंगवार में गिरधारी के अलावा कुंटू सिंह, अखंड सिंह सहित छह लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। गैंगवार में पुलिस अभी तक तीन मददगार व एक शूटर को गिरफ्तार कर चुकी है।
वारदात के बाद गिरधारी दिल्ली भाग गया था। 11 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। 10 फरवरी को लखनऊ के कोर्ट में पेश किया। जहां से कोर्ट ने जेल भेज दिया। 11 फरवरी को विभूतिखंड पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में कस्टडी रिमांड की अर्जी डाली। 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान 13 से 16 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए सीजेएम सुशील कुमारी ने रिमांड मंजूर की। शनिवार को कई राउंड पूछताछ की गई। रविवार देर रात तक पूछताछ के बाद उसने असलहा बरामद कराने के लिए हामी भरी। पुलिस रात करीब 2.30 बजे उसे लेकर खरगापुर के लिए निकली थी।