करोड़ों की जमीन हथियाने के लिए हिस्ट्रीशीटर को पुलिस से मिलकर फर्जी एनकाउंटर में मरवाने के आरोपी पूर्व डिप्टी मेयर अभय सेठ के साथ व्यवसायी अशोक मिश्रा और पुलिस कर्मी रामचंदर व शिवभूषण दोषी ठहराते हुए एडीजे स्वप्ना सिंह ने आजीवन कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया है।
कोर्ट में सरकारी वकील शैलेन्द्र यादव व रामस्वरूप ने कोर्ट में तर्क दिया कि 26 फरवरी 1994 को अलीगंज पुलिस ने मुठभेड़ में कानपुर व लखनऊ के शातिर अपराधी गोपाल मिश्रा को मार गिराने का दावा किया था।
पुलिस कर्मियों का कहना था कि गोपाल मिश्रा ने उन पर जानलेवा हमला किया था जिसके जवाब में उन्होंने अपने प्राण बचाने के लिए गोलियों चलाईं। जवाबी फायरिंग में गोपाल की मौत हो गई।
जबकि गोपाल की मौत के साथ ही चर्चा मुखर हो गई थी कि करोड़ों की जमीन के मामले में उसकी सुनियोजित तरीके से हत्या कराई गई। हालांकि यह तथ्य लिखित में नहीं आया था पर कहा जा रहा था कि गोपा उसी मोहल्ले में एक कमरा किराए पर लिए हुए था। यहां उसकी एक महिला मित्र के होने की भी चर्चा थी।
घटना का बाद कुछ लोगों ने कहा था कि पुलिस को मालूम था कि गोपाल कहां रहता है और एक पुलिस कर्मी उसे उसके कमरे से बुलाकर अपने साथ लाया था. यहां पहले से ही मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने दिन दहाड़े उसे गोली मार दी थी।
इसके बाद गोपाल मिश्रा के पिता सतगुरू शरण मिश्रा ने इस एनकाउंटर पर उंगली उठाते हुए मुख्यमंत्री को अर्जी दी जिस पर मुख्यमंत्री ने 4 मार्च 1994 को इस मुठभेड़ की जांच के आदेश दिए थे तथा सीबीसीआईडी ने इस मामले में अपनी अंतिम आख्या 16 नवम्बर 1996 को लगा कर अपनी विवेचना शुरू की।
कहा गया कि सीबीसीआईडी ने इस मामले को हत्या मानते हुए पूर्व डिप्टी मेयर अभय सेठ, अशोक मिश्रा, तत्कालीन थानाध्यक्ष अलीगंज डीडीएस राठौर, मुंशीलाल, रामचन्दर व शिव भूषण के खिलाफ 27 सितम्बर 2008 को चार्जशीट लगाते हुए बताया कि करोड़ों की जमीन हड़पने के चलते गोयल मिश्रा की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई। विचारण के दौरान डीडीएस राठौर व मुंशीलाल की मृत्यु हो गई थी।