अधिकारियों का तर्क है कि एलडीए से भेजी गई जिम्मेदारों की गलत रिपोर्ट से जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। ऐसे में गलत रिपोर्ट भेजने वाले पर पहले कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, तीन साल में सात निर्दोषों के जिंदा जल कर मर जाने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। अधिकारी होटल मालिकों तक पर सख्ती नहीं करा पाए।
एसजेएस इंटरनेशनल का रेनोवेशन शुरू
तीन साल पहले हादसे के बाद भी एलडीए की लापरवाही जारी है। मौके पर जहां होटल विराट ने अपना निर्माण पूरी तरह तोड़ दिया है। वहीं एलडीए के दो बाद ध्वस्तीकरण करने के बाद भी दूसरे सटे हुए होटल एसजेएस इंटरनेशनल का रिनोवेशन फिर से शुरू कर दिया गया है। इतना ही नहीं पिछले साल आई शमन नीति में इंजीनियरों ने इस होटल की बिल्डिंग का चोरी-छिपे शमन भी कर दिया। इसकी भनक तक किसी को नहीं लगने दी गई। इसी का फायदा उठा भवन स्वामी ने रेनोवेशन चालू कर दिया।
एलडीए और आवास विभाग दोनों के अधिकारियों से यह सवाल उठता है कि आखिर कितने सालों में इन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो पाएगी। इसमें आईएएस, पीसीएस अधिकारियों के अलावा इंजीनियर सहित करीब 30 को एलडीए से जिम्मेदार पाया गया था। जिन्होंने अपना काम नहीं किया।