उत्तर प्रदेश में एक नया गैंग उभर रहा है, जिसकी महारथ बताई जा रही है किडनैपिंग।
बताया जा रहा है कि इसने पहली ही वारदात में यूपी पुलिस को ढेर कर दिया है।
इसकी तस्दीक की है हाल ही में हुई एक किडनैपिंग की वारदात ने।
पिछली 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक झोलाछाप डॉक्टर भवानी प्रसाद तिवारी का अपहरण कर इस गैंग ने सनसनी फैला दी थी। हालांकि, पुलिस ने इस मामले को शुरुआत में हल्के में लिया। इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा मंगलवार को।
जिस मामले को पुलिस नाटक बता रही थी और कहा जा रहा था कि डॉक्टर खुद कहीं गायब हो गया है, उसकी किडनैपिंग एक नए गैंग ने की थी। इसका खुलासा मंगलवार को हुआ, जब डॉक्टर की पत्नी ने 10 लाख की फिरौती देकर अपने पति को गैंग के कब्जे से छुड़ा लिया।
सूत्रों ने बताया कि यूपी पुलिस की एसओजी टीम, क्राइम ब्रांच और मलिहाबाद पुलिस इस पूरे मामले पर नजर तो गड़ाए हुए थी, लेकिन उसके हाथ कुछ भी न लग सका। पहली बार पुलिस जाल बिछाए बैठी रही और गैंग फिरौती लेकर गायब हो गया।
पुलिस ने गैंग को पकड़ने की जगह उल्टा पीछा किया डॉक्टर का और फर्रुखाबाद के सुंदरबन स्थित अल्लानगर से पांच किलोमीटर दूर जाकर उसे रोक पाई। पूछताछ में डॉ. भवानी प्रसाद तिवारी ने बताया कि गैंग के दो लोग उसे उठाकर ले गए थे।
पुलिस से ज्यादा गैंग के वादे पर एतबार
भवानी ने यह भी बताया कि उसे दो दिन तक कुछ भी खाने को नहीं दिया गया, हालांकि गिरोह के दोनों ही सदस्य उसके परिवार से लगातार बात कर रहे थे। परिवार को भी पुलिस से ज्यादा भरोसा था गैंग के वादे पर, तभी उसने पुलिस को सारी जानकारी नहीं दी और फिरौती की रकम देकर अपने पति को छुड़ा लिया।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले में एक तरफ जहां पुलिस को इस नए गैंग के मंसूबों का डर है, तो यह पोल भी खुल गई है कि पुलिस की सर्विलांस कितनी कमजोर है।