कहते हैं कि जुर्म की दुनिया में आने का रास्ता तो है लेकिन जाने का नहीं।
इलाहाबाद के झूंसी थाने के हिस्ट्रीशीटर आशीष मिश्रा की हत्या को पुलिस इसी नजर से देख रही है। छोटी सी उम्र में उसने इलाहाबाद से मुंबई तक अंडरवर्ल्ड में नाम कमा लिया।
लेकिन बीते कुछ महीनों से वह गैंग से दूर भागने की कोशिश कर रहा था। चर्चा यह भी है कि गैंग ने एक बड़ी वारदात कर मोटी रकम बनाई। गैंग छोड़ने से पहले आशीष इस रकम का बड़ा हिस्सा ले गया। आशीष का गैंग से अलग होना और रकम डकारना साथियों को नागवार गुजरा।
कई महीनों की तलाश के बाद आशीष को ढूंढ़कर मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हत्याकांड से जुड़ी अहम जानकारियां मिल गई हैं। सिर्फ कुछ कड़ियां बाकी हैं जिन्हें जोड़कर इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा किया जाएगा।
हिस्ट्रीशीटर आशीष की हत्या गैंगवार में नहीं बल्कि उसके अपने ही साथियों ने की थी। आशीष इलाहाबाद में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन का काम देखने वाले कुख्यात का शागिर्द था। सूत्र बताते हैं कि खान मुबारक, राजेश यादव और आशीष मिलकर सुपारी किलिंग,लूट,हत्या,अपहरण और रंगदारी वसूलने का काम करते थे।
चार साल पहले राजेश यादव और आशीष मिश्रा ने मुंबई में सनसनीखेज हत्याकांड किया था। खान मुबारक इस वक्त नैनी जेल में बंद है जबकि राजेश यादव फैजाबाद जेल में है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस गैंग ने एक बड़ी वारदात की जिसमें मोटी रकम मिली थी।
यह वारदात कब और कहां हुई? इसका पता लगाने के लिए राजधानी की पुलिस टीमें इलाहाबाद और फैजाबाद जेल में बंद छोटा राजन के गुर्गों से पूछताछ कर रही हैं। अंडरवर्ल्ड में चर्चा यह भी है कि इस वारदात में मिली रकम का बड़ा हिस्सा आशीष के पास था।
इसी रकम के बल पर नई दुनिया बसाने के इरादे से आशीष गैंग से अलग हो गया। उसने अपने मोबाइल नंबर भी बदल लिए और लखनऊ आकर प्रापर्टी डीलिंग का धंधा करने लगा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आशीष के गैंग से अलग होने और रकम डकारने से उसके साथी बेचैन हो गए।
आशीष की इस हरकत को गद्दारी का नाम दिया गया। गैंग को यह भी डर था कि आशीष कहीं पुलिस का मुखबिर न बन जाए। यही वजह है कि अंडरवर्ल्ड के आकाओं ने उसे खत्म करने का फरमान जारी कर दिया। हालांकि, आशीष की तलाश में अंडरवर्ल्ड को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कई महीनों की सुरागरसी के बाद आशीष का पता चला और उसकी व उसके साथी रोहित शुक्ला को गोलियों से छलनी कर दिया गया। पुलिस सूत्रों का यह भी मानना है कि हत्यारों ने आशीष को मारने के बाद रकम की तलाश में उसका कमरा भी खंगाला।
हालांकि, कमरे में तख्त और गद्दों के सिवा कुछ नहीं था। इसके बाद हत्यारों ने आशीष की कार की तलाशी ली। सूत्रों का मानना है कि रकम अगर कार में रखी होगी तो बदमाश ले गए होंगे। हत्याकांड के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को कार के चारों दरवाजे खुले मिले थे।
पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड के खुलासा लगभग कर दिया है। शूटरों के नाम भी पता चल गए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार हत्यारे आशीष के ही साथी हैं जिनकी जल्द गिरफ्तारी कर ली जाएगी।