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मासूम शिवम के हत्यारों पर फूटा लोगों का गुस्सा

Fri, 29 Nov 2013 02:11 AM IST
अनिल त्रिपाठी/लखनऊ
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मासूम शिवम के हत्यारों पर लोगों का गुस्सा फुट पड़ा। बृहस्पतिवार सुबह नाराज भीड़ ने ठाकुरंगज थाने पहुंच आरोपियों को घेर लिया और मारपीट पर उतारू हो गए।
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इससे पहले आरोपियों के घर भी अभद्रता की गई। पुलिस ने बमुश्किल हालात संभाले। तनाव देखते हुए इलाके में फोर्स तैनात कर दी गई है।

दोपहर बाद हत्या के आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया। जमानत पर सुनाई के बाद सीजेएम ने आरोपियों को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

24 नवंबर को ठाकुरगंज में कनक सिटी के शरीपुरा चंद्रिका बिहार कॉलोनी में दुकान करने वाले संतोष जोशी ने भांजे सोनू और अजय उर्फ करन के साथ दौलत की लालच में मनोज गुप्ता के चार वर्षीय बेटे शिवम को अगवा किया।

इसके बाद पकड़े जाने के डर से हत्या कर मासूम का शव गोमती में फेंक दिया था। आठ लाख रुपये फिरौती मांगने पर ठाकुरगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों को धर दबोचा।
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पढ़ें-मासूम को मारकर 'अंकल' ने मांगी आठ लाख फिरौती

आरोपियों से थाने पर पूछताछ चल ही रही थी कि करीब साढ़े 10 बजे गुस्साई भीड़ ने उनके घर धावा बोला और जमकर अभद्रता की। इसके बाद थाने जा पहुंची और घेर लिया। पुलिस ने बमुश्किल हालात संभाले।

उधर, दोपहर बाद भारी सुरक्षा घेरे में आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया। जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद सीजेएम ने आरोपी संतोष, सोनू एवं अजय को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

ठाकुरगंज पुलिस का कहना है कि पीएसी के गोताखोर शव की तलाश कर रहे हैं। दो नाव से घैला पुल से इंदिरा बैराज तक जाल डालकर खंगाला।

पूछताछ में एक मछुवारे ने पुलिस को बताया कि मंगलवार को एक बच्चे का शव उतराते देखा गया था। गोताखोर देर रात तक गोमती नदी खंगालते रहे। मगर, शव का पता नहीं चल सका था
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मुखबिर था मुख्य आरोपी संतोष
पुलिस के अनुसार संतोष जोशी पुलिस का मददगार रह चुका है। एसओ ठाकुरगंज ने संतोष को दस्तावेजों में पुलिस मित्र भी बनाया था। इसके चलते उसका थाने में भी उठना बैठना था।

सूत्रों के अनुसार अपहरण की सूचना पर पुलिस ने सबसे पहले संतोष से ही जानकारी लेने का प्रयास किया था। लेकिन उसका मोबाइल बंद था।

मनोज का आरोप है कि, पुलिस का करीबी होने के चलते शिकायत के बावजूद ठाकुरगंज पुलिस ने संतोष के खिलाफ कार्रवाई नहीं की थी।

सुबह फिरौती की मांग आने पर सर्विलांस सेल से संतोष के बारे में पता चला। इसके बाद ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

इतना ही पुलिस ने दबिश डालने की जगह संतोष को थाने आकर जुर्म कुबूलने को कहा। साथियों के साथ इधर-उधर भाग रहा संतोष कोई रास्ता ने देख थाने में हाजिर हुआ।

इसके बाद पुलिस ने लिखापढ़ी कर जेल भेजा। मनोज ने पुलिस कर्मियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अफसरों से शिकायत करने की बात कही है।
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