शुरूआती पड़ताल में अभिजीत की मौत को पुलिस भी सामान्य मान रही थी। परिवारीजनों की कहानी पर भरोसा किया और हार्ट अटैक से मौत की बात मान ली। इसके बाद जब पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा गया। वहां चार बजे के करीब जब मौत गला घोंटने से होने की पुष्टि हुई तो पुलिस के होश उड़ गये। पुलिस ने आनन-फानन में एएसपी पूर्वी सर्वेश मिश्रा, एएसपी क्राइम दिनेश कुमार सिंह, फोरेंसिक टीम को सभापति केदारूलशफा स्थित आवास पर पड़ताल के लिए भेजा।
वहां पुलिस को कई ऐसे साक्ष्य मिले। जिससे संदेह होने लगा कि घर के अंदर ही अभिजीत का हत्यारा है। हत्या को साजिश रचकर सामान्य मौत की कहानी बनाई गई। सारे सबूत नष्ट किए गये। पुलिस ने घर का कोना-कोना छाना। किचन से लेकर बेडरूम तक कई ऐसे सबूत मिले जो अभिजीत की हत्या की पुष्टि कर रहे थे।
सबूतों को नष्ट करने का संदेह मीरा यादव पर गया। फोरेंसिक टीम जब भी कोई साक्ष्य जुटाती मीरा हाथ से छीनकर किचन में ले जाती। वहां डस्टबीन में डाल देती। इससे नाराज पुलिस अधिकारियों ने सख्ती की। इसके बाद साक्ष्य जुटाए जा सकें।
प्रभारी निरीक्षक राधा रमण सिंह के मुताबिक अभिजीत नशे का आदी हो चुका था। वह नशे की हालत में जब भी घर पहुंचता लड़ाई झगड़ा करता था। कभी कभी तो वह मारपीट पर आमादा हो जाता। मीरा यादव खुद को बचाने के लिए अक्सर बड़े बेटे अभिषेक को घर बुलाती थी।
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि अभिजीत ने नशे की हालत में एक बार मीरा पर चाकू से कई वार कर दिये थे। उसके इस आदत से डर कर मां घर में कोई भी धारदार सामान या भारी सामान सामने नहीं रहने देना चाहती। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक शनिवार रात को भी जब मीरा ने गुस्से में उसे थप्पड़ मारा था। अभिजीत नाराज हो गया। उसने मां पर कलछुल से कई बार वार किया। इससे गुस्से में आई मीरा ने उसकी हत्या कर दी।
क्षेत्राधिकारी हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि अभिजीत की हत्या रात करीब दो से तीन बजे के बीच हुई थी। रात 11 बजे वह नशे की हालत में घर में पहुंचा। करीब आधा घंटे तक वह मां से गाली गलौज करता रहा। इसके बाद गुस्से में मां मीरा ने करीब 12 बजे उसे मारना शुरू कर दिया। बेहोशी की हालत में उसका गला घोंट दिया। दोनों के बीच झगड़ा करीब दो घंटे से अधिक देर तक चला।
जिस सरकारी आवास में अभिजीत की हत्या हुई थी। वहीं से सभापति की दूसरी पत्नी मीरा यादव को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी सुबह करीब 6.05 बजे हुई। लेकिन पुलिस ने लापरवाही बरतते हुए आवास को सील नहीं किया। इस आवास पर सभापति के परिवार के लोगों ने ताला बंद किया और चाबी साथ लेकर चले गये।
दोपहर करीब दो बजे जब उच्चाधिकारियों ने पूरे मामले की जानकारी हासिल की। इस दौरान अधिकारियों को वारदात स्थल को सील करने का ख्याल आया। आनन-फानन में चौकी प्रभारी को भेजकर सरकारी आवास को सील कराया गया। इस दौरान करीब चार बज गया था। हालांकि इसके पहले ही पुलिस ने फोरेंसिक टीम से साक्ष्य जुटा लिए थे।