भले ही अखिलेश सरकार किसानों और गरीब लोगों के लिए सुलभ और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा देने की बात करते हों, लेकिन असलियत कुछ और ही है।
इसकी बानगी रविवार को शताब्दी अस्पताल में देखने को मिली, जहां एक किसान ने अस्पताल की तीसरी मंजिल से आत्महत्या करने के लिए छलांग लगा दी।
इससे भी बच गया तो ईंट से सिर कूंचकर अपनी जान देने की कोशिश की। वह अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए कर्ज में डूबा हुआ था।
उन्नाव के हसनगंज कोटा कल्याण निवासी किसान 42 वर्षीय राम सुमेर की पत्नी सरिता ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित है।
केजीएमयू के आंकोलॉजी विभाग में उसका इलाज चल रहा था। पत्नी के इलाज के लिए अनाज बेचा। उससे भी पूरा न हुआ तो 32 हजार रुपये कर्ज लिया।
जमीन गिरवी रख दी। बाहर की दवाएं, खाना में ही सारा पैसा चला गया। इस आस में 70 हजार रुपये खर्च कर दिए कि सरिता ठीक हो जाएगी। सात बार कीमोथेरेपी के बाद डॉक्टरों ने सरिता के ऑपरेशन का सुझाव दिया।
सुमेर ने ऑपरेशन के लिए सरिता को गुरुवार को भर्ती भी कराया। इस बीच, घर का खर्च कैसे चलेगा, तीन बच्चे क्या खाएंगे, इसको लेकर पत्नी ने टोका तो वह टूट गया। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर जाकर छलांग लगा दी।
एक पाइप से टकराकर वह नीचे गिरा और उसकी जान बच गई। चोट के बावजूद हताशा इस कदर हावी रही कि उसने अपना सिर ईंट से कूंचने की कोशिश की।
वहां मौजूद लोगों ने उसे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। डॉक्टरों का कहना है कि सीटी स्कैन में सामान्य पाए जाने पर उसे चार घंटे बाद छुट्टी दे दी गई।
क्यों नहीं मिला फ्री इलाज, होगी जांच
केजीएमयू के सीएमएस डॉ.एसएन शंखवार ने कहा, सरिता को मुफ्त इलाज क्यों नहीं मिला, इस बारे में सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के हेड और कंसल्टेंट से पूछा जाएगा।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने कैंसर, हृदय रोग, किडनी व लिवर के असाध्य रोगों का इलाज मुफ्त करने का निर्देश दे रखा है।