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यूपीः यहां जेल के अंदर से चलता है माफिया राज!

Sun, 18 Jan 2015 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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जेल का नाम आते ही तीन तरफ से बंद कमरा जिसके आगे के हिस्से में लगी सलाखों वाली तस्वीर ही जेहन में आती है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। सूबे में माफिया और दबंगों के बाहुबल व धनबल के आगे जेल अधिकारी नतमस्तक हैं। यही कारण है कि इन्हें जेल में हर तरह की सुविधाएं मुहैया हो जाती हैं।
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आए दिन जेलों में महंगे सामान मिलना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।जेलों में हथियारों का न सिर्फ पहुंचना बल्कि गैंगवार होना भी यह दर्शाता है कि वहां किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था है। मथुरा जेल में गैंगवार ने भी इस बात को पुख्ता किया है। कई बार रसूखदार जेल में आते ही बीमार होने का बहाना बना लेते हैं। इससे वे आम कैदियों की तरह बैरक में रहने के बजाय जेल अस्पताल में दाखिल हो जाते हैं।

जेल अधिकारियों व डॉक्टरों की मिलीभगत से अस्पताल में भर्ती होने के बाद ये न सिर्फ मनमाने तरीके से वहां रहते हैं बल्कि सभी सुविधाओं का लाभ भी उठाते हैं। गाजीपुर जेल में मुख्तार अंसारी और नैनी जेल में लंबे समय तक चला माफिया बबलू का साम्राज्य भी इसकी पुष्टि करते हैं।
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जेल के अंदर बैठकर करते हैं वसूली

जेल अस्पताल में उनसे मिलने मुलाकाती भी आते हैं और वहां से उनके लोगों को निर्देश भी जारी होते हैं। कई बार ऐसी शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं कि जेल में निरुद्ध रहने के दौरान माफिया के समर्थक बाहर धमकी देते हैं और अवैध वसूली भी करते हैं।

कई बड़े अपराधियों के बारे में पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को पुख्ता जानकारी है कि जेल में रहने बाद भी विभिन्न विभागों के ठेकों में इनका दखल जारी है।

जेलों में सिम कार्ड व मोबाइल पहुंचना आम बात है। वहां लगे जैमर भी बस नाम के हैं। मोबाइल के जरिये जेल से ही माफिया अपने रंगदारी व फिरौती के धंधे को अंजाम दे रहे हैं। वे अपने गुर्गों से हत्या-लूट, डकैती व अपहरण करा रहे हैं। जेल अधिकारियों की मदद से नाच-गाने व डांस पार्टियां होती हैं।
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दस गुना पैसा देकर मिलती है सुविधा

जेल में सुविधाओं के लिए ऊंची कीमत देनी पड़ती है। बैरक बदलने से लेकर मुलाहिजा कटवाने, मनचाहा भोजन या किसी अन्य सुविधा के लिए अलग-अलग रेट तय हैं। जेल सूत्रों के अनुसार जैसी सुविधा वैसा रेट होता है।

यानी 10 रुपये की जो चीज बाजार में मिलती है उसकी जेल के अंदर कीमत 100 रुपये हो जाती है। कानपुर के ज्योति मर्डर केस के आरोपियों को जेल में पिज्जा-बर्गर व अन्य सुविधाएं मिल गई थीं।

हाल ही में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं। अक्तूबर 2013 कन्नौज जेल में दो गुटों में संघर्ष, मोबाइल फोन मिले। नवंबर 2014-सुल्तानपुर जेल में दो गुटों में भिड़ंत, सौ से अधिक घायल, यहां की जेल में बर्थडे पार्टी का आयोजन किया गया। दिसंबर 2014-गोरखपुर जेल में दो गुटों में मारपीट, कारागार में डीआईजी की जांच में अवैध सिमकार्ड व मोबाइल फोन बरामद हुए। वाराणसी जेल में अन्नू त्रिपाठी हत्याकांड  हुआ।

एडीजी जेल आरआर भटनागर ने बताया कि मथुरा जेल में दो गुटों में फायरिंग की घटना सामने आई है। इसकी जांच की जा रही है। जहां तक जेलों में अनियमितताओं का मामला है तो इसकी कड़ाई से जांच कराई जाएगी।
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