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आप बेरोजगार हैं और नौकरी ढूंढ़ रहे हैं खबर है आपके काम की

Fri, 05 Feb 2016 01:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू में नौकरी का झांसा देकर पुणे के शातिर रिकेश मुरलीधर कांबले ने सूबे के दो हजार से अधिक लोगों से लाखों रुपये ठग लिए। रिकेश ने गोमतीनगर के राप्ती अपार्टमेंट में दो महीना पहले किराये के फ्लैट में हेडेन इंटरनेशनल ग्रुप इंडिया लिमिटेड के नाम से ऑफिस खोलकर युवक-युवतियों का रजिस्ट्रेशन कराया।
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प्रत्येक आवेदक से रजिस्ट्रेशन के नाम पर 500 रुपये और अन्य औपचारिकताओं के बहाने 200 रुपये वसूले। बृहस्पतिवार सुबह उसने यूनीफॉर्म वितरण और ड्यूटी जॉइन के लिए युवक-युवतियों को केजीएमयू बुलाया।

बाराबंकी, रायबरेली, सीतापुर, गोंडा, बहराइच, उन्नाव, इलाहाबाद, कानपुर से करीब 250 युवक-युवतियां केजीएमयू पहुंचे, लेकिन रिकेश नहीं आया। उसके छह मोबाइल नंबर स्विच ऑफ थे।
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ठगी के शिकार उसके ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। गुस्साए पीड़ित रिकेश की कथित पत्नी बालागंज के हरिनगर गौशाला रोड निवासी साधना गौतम के घर पहुंचे तो उसने भी पल्ला झाड़ लिया।

पीड़ितों ने ठाकुरगंज थाना पहुंचकर तहरीर दी। हालांकि, एसओ समर बहादुर यादव ने घटनास्थल गोमतीनगर थाना क्षेत्र का बताते हुए पीड़ितों को वहां भेज दिया।

टेस्ट और इंटरव्यू कराकर सौंपे आईकार्ड

टेस्ट व इंटरव्यू के बाद नौकरी मिलने की बात कहते हुए ठगों ने आवेदकों को केजीएमयू के आईकार्ड दिए थे। पीड़ितों ने बताया कि विराटखंड के एक मकान में चल रहे छोटे से स्कूल में पांच जनवरी को उन्हें टेस्ट व इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। यहां आठ-आठ का बैच बनाकर दिनभर टेस्ट व इंटरव्यू की प्रक्रिया चली।

रिकेश ने केजीएमयू में साइट मैनेजर के पद पर 52000 रुपये सैलरी बताई थी। सीनियर मैनेजर के पद पर 44000 रुपये, कोऑर्डिनेटर को 35000 रुपये और सुपरवाइजर को 15000 रुपये देने का झांसा दिया था। इसके अलावा आया और अटेंडेंट के कई छोटे पद भी थे, जिनकी सैलरी 10000 से 8000 रुपये रखी गई थी।
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सैलेरी मांगी तो बंद कर दिया ऑफिस

गोमतीनगर में रिकेश ने शानदार ऑफिस खोला। उसने कथित पत्नी साधना गौतम को स्टेट कोआर्डिनेटर और इंदिरानगर के मानवेंद्र यादव को सीनियर मैनेजर बनाया। इन्हें 50-50,000 रुपये सैलरी देने की बात कही गई। कई शानदार गाड़ियां किराये पर ली गईं।

हर रात किसी न किसी होटल में पार्टी होती थी। उसने अपनी कंपनी में राजवंत पांडेय को ऑफिस असिस्टेंट, अमित सिंह यादव को कोआर्डिनेटर, मोतीलाल को अधिकारी और रामनारायन तिवारी, सुरेश, अमन और सौरभ को सुपरवाइजर बनाया था।

एक महीने के बाद स्टाफ को सेलेरी नहीं मिली तो लोगों ने रिकेश से संपर्क किया। वह चेक क्लियर न होने का झांसा देकर स्टाफ को बरगलाता रहा। डेढ़ महीना बाद स्टाफ ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। 23 जनवरी को रिकेश ने गोमतीनगर का ऑफिस बंद कर दिया। उसने साधना गौतम के घर पर ऑफिस शुरू किया। यहां से भी दो फरवरी को सामान समेटकर गायब हो गया।
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