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गुजरात ATS ने आतंकी के साथी को लखनऊ में दबोचा

Fri, 10 Apr 2015 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आंध्र प्रदेश के वारंगल में सिमी आतंकियों के एनकाउंटर से राजधानी का आतंकी कनेक्शन और खुफिया एजेंसियों की नाकामी खुलकर सामने आ गई है।
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इसी क्रम में बृहस्पतिवार सुबह गुजरात से आई एटीएस टीम ने कैसरबाग से आतंकियों के मददगार सैय्यद आसिम उज्जमा उर्फ मंजूर आजाद (40) को दबोच लिया और राजधानी की पुलिस व खुफिया एजेंसियां टापती रह गईं। उज्जमा वारंगल में एनकाउंटर में मारे गए अमीनाबाद के मॉडल हाउस निवासी मो. इजहार खान का साथी है और यहां रियल एस्टेट का कारोबार करता है।

वारंगल मुठभेड़ में मारे गए सिमी आतंकियों के सरगना विकार उर्फ विकारुद्दीन को गुजरात पुलिस ने 2010 में गिरफ्तार किया था। विकार सिपाही विनय यादव की हत्या का मुख्य आरोपी था। उसने पूछताछ में गुजरात में कई बार लूटपाट की बात कबूली।
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इस रकम से उसने लखनऊ जाकर बैरूनी खंदक निवासी इजहार से 2003, 2004 और 2005 में असलहे खरीदे। पहली बार उसने 65 हजार में देशी पिस्टल, फिर 55 हजार में देशी रिवाल्वर और फिर पांच लाख में फैक्ट्री मेड पिस्टल खरीदा था। सभी असलहे उसे इजहार ने उपलब्ध कराए थे।

इसके बाद जब यूपी एटीएस ने इजहार को पकड़ कर गुजरात एटीएस को सौंपा तो इजहार ने पूछताछ के दौरान आसिम उजमा का नाम लिया था। इजहार ने बताया था कि हथियारों की नाजायज खरीद-फरोख्त में आसिम उज्जमा उसका सहयोगी था।

16 मार्च 2015 से था वांछित

गुजरात एटीएस ने आसिम को लखनऊ से गुजरात ले जाकर एक बार पूछताछ की, पर बाद में छोड़ दिया। अहमदाबाद की अदालत ने 16 मार्च 2015 को उज्जमा को वांछित घोषित किया था। इसी क्रम में गुजरात एटीएस ने उसे पकड़ा है। एटीएस शुक्रवार को अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर उसे ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ ले जाएगी।

कैसरबाग पुलिस से पूछा पता
सीओ कैसरबाग राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गुजरात एटीएस की टीम सुबह आई और उज्जमा का पता पूछा। कैसरबाग पुलिस एटीएस टीम को उजमा के सलेमपुर हाउस के मकान संख्या 25 स्थित उजमा के ठिकाने पर ले गई। करीब दस बजे उज्जमा घर से बाहर निकला, तभी एटीएस ने उसे दबोच लिया। उज्जमा की इजहार से सात साल पहले दोस्ती हुई थी।

लखनऊ पुलिस उसे बचा तो नहीं रही थी...
उज्जमा पर 2007 में अहमदाबाद के मणिनगर मुहल्ले में सिपाही विनय यादव की हत्या का आरोप है। कुछ महीने पहले भी गुजरात पुलिस ने उसकी तलाश में दबिश दी थी लेकिन वह नहीं मिला।

राजधानी पुलिस के सूत्रों का कहना है कि उज्जमा कैसरबाग पुलिस के लिए मुखबिरी करता था, इसलिए पुलिस ही उसे बचा लेती थी। गुजरात पुलिस जब-जब राजधानी आई, उसे सूचना मिल गई और वह घर से भाग गया। अबकी बार गुजरात पुलिस अचानक राजधानी पहुंच गई जिससे उजमा को बचने का मौका नहीं मिला।
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एंबुलेंस से सादे कपड़ों में आए, घर के आसपास की घेराबंदी

एटीएस टीम सादे कपड़ों में थी और साथ एंबुलेंस लेकर आई थी। दुकानदार निसार अहमद ने बताया कि टीम उज्जमा के घर के आसपास से बारादरी के पीछे खड़ी एंबुलेंस तक चक्कर लगा रही थी। करीब दस बजे उज्जमा घर से निकला तभी उसे दबोचकर तुरंत एंबुलेंस में डाल दिया गया।

दो दिन से डेरा डाले थी गुजरात एटीएस
गुजरात एटीएस दो दिन से राजधानी में थी। अहमदाबाद में सिपाही हत्याकांड में मणिनगर थाने में उसका पता राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह के सामने का था। उज्जमा ने करीब चार साल पहले उसे छोड़ दिया और सलेमपुर हाउस में रहने लगा था। मकान बदलने के कारण एटीएस टीम उसे ढूंढ़ नहीं पा रही थी।

उज्जमा ने कानपुर के चर्चित डी-टू गैंग पर बनी बाबर फिल्म में काम किया था। इसके अलावा भोजपुरी फिल्में बनाने के लिए उसने एआरएम प्रोडक्शन हाउस भी बनाया था। खुफिया एजेंसियां उसकी कंस्ट्रक्शन कंपनी और प्रोडक्शन हाउस की भी छानबीन कर रही हैं।

पत्नी के मोबाइल फोन की आउटगोइंग बंद कराई
गुजरात एटीएस ने उसकी पत्नी शीबा का मोबाइल नंबर ट्रैस कर उसकी आउटगोइंग बंद करा दी थी। उज्जमा की गिरफ्तारी के बाद शीबा ने फोन से परिवारीजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आउटगोइंग बंद मिली। उसने बताया कि उजमा तीन भाइयों में सबसे छोटा है। एक भाई हैदराबाद और एक सऊदी अरब में रहता है। दोनों लखनऊ आ रहे हैं।
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