अगर वाहन बीमा कराने जा रहे हैं तो पूरी पड़ताल कर लीजिए,क्योंकि जरा सी चूक से आप फर्जी बीमे के जाल में फंस सकते हैं। हाल में एक जज के साथ ऐसे ही जालसाजी का खुलासा हुआ है।
मामले में जज ने हजरतगंज स्थित तान्या ऑटोमोबाइल्स के मालिक वशिष्ठ गर्ग को आरोपी बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराई है।
गोरखपुर के बांसगांव में तैनात अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) संजय कुमार वर्ष 2012 में लखनऊ में तैनात थे।
उन्होंने 20 नवंबर 2012 को अपनी गाड़ी (यूपी 32 डीएल 7347) का बीमा कराने के लिए हजरतगंज स्थित तान्या ऑटोमोबाइल्स से सम्पर्क किया और 10,118 रुपये दिए।
इसके बाद तान्या ऑटोमोबाइल्स ने अपर सिविल जज संजय कुमार को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से जारी एक बीमा पॉलिसी दे दी। अप्रैल 2013 में संजय कुमार का स्थानांतरण गोरखपुर के बांसगांव में हो गया।
20 नवंबर 2013 को बीमा अवधि समाप्त होने पर उन्होंने नवीनीकरण कराने के लिए गोरखपुर के आरकेबीके ऑटोमोबाइल्स से संपर्क किया तो पता चला कि पिछले बीमे की पॉलिसी नंबर पर उनकी गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं हुआ है।
इस पर हैरान अपर सिविल जज ने तान्या ऑटोमोबाइल्स के कर्मचारियों को फोन किया तो किसी ने उचित जवाब नहीं दिया।
इसके बाद अपर सिविल जज संजय कुमार ने आहत होकर अपने साथ हुई धोखाधड़ी की रिपोर्ट 2 दिसंबर को हजरतगंज थाने में दर्ज कराकर तान्या ऑटोमोबाइल्स के मालिक वशिष्ट गर्ग तथा अन्य कर्मचारियों को आरोपी बनाया है।