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शातिर ठग ने सीएम का भतीजा बनकर भी लूटा

Tue, 23 Jun 2015 01:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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शिवपाल यादव और प्रतीक यादव बनकर ठगी करने वाले शातिर रामशंकर शाक्य ने बहराइच के ठेकेदार अतुल जायसवाल को सीएम का भतीजा बताकर 18 लाख रुपये ठगे थे। सोमवार को अखबारों में रामशंकर शाक्य की गिरफ्तारी की खबर पढ़कर पीड़ित ठेकेदार हजरतगंज कोतवाली पहुंचे और सीओ अशोक कुमार वर्मा से ठगी की शिकायत की।
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सीओ ने अतुल की शिकायत को शाक्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर में शामिल करा दिया है। सीओ ने बताया कि शाक्य के शिकार कई अन्य लोगों ने भी उनसे संपर्क किया है।

बहराइच के दरगाह हमजापुरा निवासी अतुल यहां गोमतीनगर विस्तार स्थित सरस्वती अपार्टमेंट में किराए का फ्लैट लेकर रहते हैं। बकौल अतुल, एक साल पहले उनके पार्टनर राहुल शुक्ला ने शाक्य से मुलाकात कराई। शाक्य ने अपना परिचय सीएम के भतीजे रामशंकर यादव के रूप में दिया। उसने राहुल को भी यही परिचय दिया था।

राहुल ने बताया कि शाक्य के एक इशारे पर विभाग के अफसर बड़े-बड़े काम कर देते हैं। अतुल ने शाक्य से बालू भंडारण का टेंडर दिलाने की बात की थी। अतुल का कहना है कि टेंडर दिलाने के लिए शाक्य ने 13 लाख रुपये मांगे। इस बीच समाज कल्याण विभाग में भी एक टेंडर के लिए उसने शाक्य से बातचीत की।
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दोनों टेंडर के लिए अतुल ने शाक्य को 18 लाख रुपये दिए। हालांकि, टेंडर नहीं मिला। रुपया मांगने पर शाक्य ने उसे अलग-अलग राशि के तीन चेक दिए जो बाउंस हो गए। इसके बाद शाक्य ने उससे मिलना व फोन उठाना बंद कर दिया। अतुल की शिकायत पर हजरतगंज पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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आरएम पर भी पांच लाख ठगने का आरोप

ठेकेदार अतुल जायसवाल ने बताया कि वह समाज कल्याण विभाग का काम करते हैं। करीब आठ महीने पहले समाज कल्याण विभाग के एक रीजनल मैनेजर ने उन्हें ठेका दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये लिए थे।

यह रीजनल मैनेजर पहले बहराइच में ही तैनात थे, लेकिन अब मुख्यालय में बैठते हैं। परिचित होने के नाते उन पर विश्वास करके रकम दे दी। ठेका नहीं मिला तो उन्होंने रकम वापस मांगी।

आरोप है कि इस पर रीजनल मैनेजर ने उन्हें धमकाकर भगा दिया। अतुल ने सीओ से रीजनल मैनेजर की भी शिकायत की है। अतुल का कहना है कि उक्त रीजनल मैनेजर भी शाक्य का परिचित था।

चेक दिए तब पता चला असली नाम
अतुल ने बताया कि शाक्य ने जब उन्हें चेक दी तब असली नाम के बारे में पता चला। शाक्य ने अपना परिचय रामशंकर यादव के रूप में दिया था।

चेक में रामशंकर शाक्य देखकर अतुल ने उससे पूछताछ की तो वह सकपका गया। बाद में संभलते हुए शाक्य ने कहा कि इटावा की तरफ कुछ यादव अपने को शाक्य भी लिखते हैं।
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