फर्रुखाबाद के डलमंजन सिंह यादव ने जिस शातिर को पैरोल पर जेल से बाहर निकलवाया उसी ने उनके रिश्तेदारों को सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 20 लाख रुपये ठग लिए।
शातिर ने पहले फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर लखनऊ में ट्रेनिंग कराई। इसके बाद कैरेक्टर सर्टिफिकेट और वेरीफिकेशन कराने की बात कहकर घर भेज दिया।
औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब युवकों ने ठग से संपर्क करने की कोशिश की तो वह मोबाइल फोन बंद कर गायब हो गया।
शनिवार को तीनों ने सीओ हजरतगंज को पूरा मामला बताया। इसके बाद हुसैनगंज थाना में चार ठगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
फर्रुखाबाद के मेरापुर थाना क्षेत्र के नदौरा निवासी सुनील ने बताया कि डलमंजन सिंह यादव उसके चाचा हैं। मैनपुरी में पुलिस लाइंस गेट के सामने आजादनगर निवासी हाजी खां के बेटे जलालुद्दीन ने जनवरी 2013 में उससे संपर्क किया था।
बकौल सुनील जलालुद्दीन की मां का इंतकाल हो गया था और पिता हाजी खां किसी मामले में मथुरा जेल में बंद थे। मां के चालीसवां में शामिल होने के लिए जलालुद्दीन ने पिता को पैरोल पर छोड़ने की सिफारिश कराने को कहा था।
सुनील ने बताया कि डलमंजन सिंह ने सिफारिश लगवाई जिसके बाद हाजी खां को 90 दिन के पैरोल पर छोड़ दिया गया। जेल से बाहर आते ही हाजी खां डलमंजन से मिला।
सचिवालय में अच्छे संबंध होने का झांसा देते हुए परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दिलाने की पेशकश की। डलमंजन ने सुनील के अलावा भतीजे विजय विक्रम और प्रबल प्रताप को नौकरी दिलाने के लिए कहा।
कानपुर निवासी विजय विक्रम बीएससी का छात्र है। हाजी खां ने विजय को सचिवालय में समीक्षा अधिकारी,सुनील को ड्राइवर और प्रबल को चपरासी पद पर नियुक्ति के लिए 20 लाख रुपये का खर्च बताया।
पैसे का इंतजाम होते ही डलमंजन ने हाजी खां से संपर्क किया। उसने 20 मार्च को सबको राजधानी के हुसैनगंज स्थित रुक्मणि लॉज बुलवाया। यहां हाजी खां के साथ जलालुद्दीन और मथुरा का एक सिपाही विमलेश भी था।
कुछ देर बाद तिरंगा झंडा लगी सफेद अंबेसडर कार (यूपी 32 एएन 4514) से एक व्यक्ति वहां आया। हाजी खां ने उसका परिचय सचिव सचिवालय नियुक्ति नंद किशोर गौतम उर्फ राकेश गौतम के रूप में कराया।
बातचीत के बाद डलमंजन सिंह ने कथित सचिव को 20 लाख रुपये सौंप दिए। तीन-चार दिन में नियुक्ति पत्र देने की बात कहते हुए वह चला गया।
शातिरों ने जवाहर भवन में कराई ट्रेनिंग
सुनील ने बताया कि करीब 20 दिन बाद डाक से उसका व विजय विक्रम का नियुक्ति पत्र आ गया। अप्रैल में ही जलालुद्दीन तीनों को लेकर लखनऊ पहुंचा।
यहां जवाहर भवन के पास कथित सचिव नंद किशोर गौतम से मुलाकात हुई। इस बार उसकी कार का नंबर दूसरा (यूपी 32 एजेड 7207) था।
उसने विजय को बहाने से वापस भेज दिया और सुनील को सभी प्रमाणपत्रों और कैरेक्टर वेरीफिकेशन कराकर आने को कहा। वहीं प्रबल को 15 दिन की चपरासी ट्रेनिंग के लिए रोक लिया।
प्रबल को सफेद शर्ट-पैंट और लाल पट्टा व कोषागार निदेशालय का पीतल का बिल्ला देकर जवाहर भवन के मेन गेट पर खड़ा कर दिया जाता।
कथित सचिव नंद किशोर रोज एक रजिस्टर पर सुबह 10 से 11 बजे के बीच उससे हस्ताक्षर बनवाता था। दो हफ्ते बाद उसे भी कैरेक्टर वेरीफिकेशन के लिए घर भेज दिया गया।