घरेलू हिंसा के चलते घर छोड़ने वाली बसपा नेता व खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के पूर्व चेयरमैन आशीष शुक्ला की बेटी के साथ हुई घटना पर कोर्ट संजीदा है।
जिला जज केके शर्मा ने सोमवार को पीड़ित को सुरक्षा मुहैया कराने और उसके पिता व भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया। जिला जज ने कहा कि लड़की बालिग है और जहां चाहे आ-जा सकती है।
इस बीच उसे शरण देने वाले एनजीओ के दफ्तर में तोड़फोड़ व एनजीओ की सदस्यों को अगवा कर मंदिर में बंधक बनाने में गिरफ्तार पांच आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया।
एक आरोपी भरत को जमानत पर छोड़ दिया गया, जबकि बाकी जेल भेज दिए गए। जिला जज ने वजीरगंज एसओ को आदेश दिया है कि पीड़ित लड़की को तत्काल एक दरोगा और दो सिपाही की सुरक्षा दी जाए।
जिला जज ने कहा कि आशीष शुक्ला, आकर्ष सहित ऐसे सभी लोग जिनके नाम लड़की बता रही है, उनके खिलाफ वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज की जाए।
इससे पूर्व एनजीओ आली की संचालिका रेनू मिश्रा ने जिला जज को पूरे मामले की जानकारी दी। रेनू ने बताया कि आशीष शुक्ला की बेटी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है।
24 अक्तूबर को वह कॉलेज जाने के लिए घर से निकली और गायब हो गई। गाजीपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज है।
महानगर स्थित आली फाउंडेशन की संचालिका ने आशीष शुक्ला को जब लड़की की सूचना दी तो उन लोगों संस्था पहुंच कर उत्पात किया।
रेनू ने कहा कि वह लोग लड़की का कलमबंद बयान दर्ज कराने के लिए कोर्ट आए थे, जहां अपर सिविल जज 22 की कोर्ट में आशीष व उनके साथियों ने लड़की को धमकाया।
कोर्ट ने इस मामले में कार्रवाई का आदेश दिया है। पीड़ित के कलमबंद बयान के बाद अपर सिविल जज मो. गाजाली केसमक्ष पेश किया गया।
कोर्ट ने कहा कि लड़की बालिग है और अकेले रहना चाहती है। ऐसे में उसे स्वेच्छा से जाने की अनुमति देते हुए थानाध्यक्ष गाजीपुर को उसकी सुरक्षा का आदेश दिया।
उधर, आरोपी विभव शंकर मिश्रा, विवेक सिंह, प्रतीक मिश्रा, अरूण कुमार पांडेय तथा श्लोक सिन्हा को महानगर पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में पेश किया।
प्रभारी एसीजेएम मो. नियाज ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लेकर छह नवंबर तक जेल भेज दिया। सिर्फ भरत को जमानत दी गई है।
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