रामानंद ने बताया कि दीपक कुमार सिंह के प्रमाण पत्रों का प्रयोग कर उसने अध्यापक की नौकरी हासिल की थी। उसी के नाम से उसने आधार व पैन कार्ड भी बनवा लिए। अंबेडकरनगर में वर्ष 2009 में नंदापुर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के तौर पर उसकी नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2014 में प्रमोशन के बाद वह रामनगर विकास खंड में प्रधानाध्यापक के पद पर भेज दिया गया। वर्ष 2016 टांडा ब्लॉक के बैरमपुर में ही प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात था।
संतकबीरनगर में ही बना था फर्जी दस्तावेज
रामानंद ने एसटीएफ को बताया कि दीपक के नाम के प्रमाण पत्रों की फर्जी द्वितीय पत्र बनवाने का काम दोनों भाइयों ने खलीलाबाद कस्बे के साहब तिवारी के साथ मिलकर किया। बाद में पैन व आधार कार्ड भी अलग-अलग नाम से बनवा लिए गए।
बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू
बीएसए अतुल कुमार सिंह का कहना है कि एसटीएफ ने दूसरे के प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षक की नौकरी करने का मामला पकड़ा है। शिक्षक रामप्रसाद को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उसकी बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।