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लुटेरा लाया फर्जी जमानतदार, खुली पोल

Sun, 18 May 2014 01:37 PM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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जेल से छूटने के लिए लुटेरे ने कोर्ट में फर्जी जमानतदार पेश कर दिए। शक होने पर नाका पुलिस ने छानबीन कराई, जिसमें सच सामने आ गया। रिपोर्ट मिलने पर कोर्ट ने लुटेरे की रिहाई रोक दी।
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इसके साथ ही लुटेरे और जमानतदारों के खिलाफ फर्जीवाड़े का एक और मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। नाका पुलिस ने बीते वर्ष विकास पांडे उर्फ डंपी को लूट के माल के साथ गिरफ्तार किया था।

विकास ने अपना मूल पता देवरिया के लार थाना क्षेत्र स्थित हरकोली गांव और हाल पता 132, कार्टन स्ट्रीट,कोलकाता बताया था। मुकदमे की सुनवाई एसीजेएम-8 की कोर्ट में चल रही है।
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छह मार्च को कोर्ट ने विकास को 35 हजार रुपये के बांड व इसी धनराशि की दो जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। कानपुर के बिल्हौर थाना क्षेत्र के उत्तरीपुरा निवासी दयाराम और रामचंद्र को जमानतदारों के रूप में पेश हुए।

दोनों ने अपनी जमीन की खसरा-खतौनी और मकान के कागजात जमानत के रूप में कोर्ट में लगाए थे। कोर्ट ने इन कागजों को सत्यापन के लिए कानपुर के बिल्हौर थाना और बिल्हौर तहसील भेजा।

वहां से मिली रिपोर्ट देख इंस्पेक्टर नाका को जमानदारों के फर्जी होने का शक हुआ। इस पर दोबारा सत्यापन के लिए हेड कांस्टेबल दिलीप मिश्रा को एक बार फिर कानपुर भेजा।

हेड कांस्टेबल की जांच में पता चला कि जमीन और मकान तो दूर दयाराम और रामचंद्र नाम के कोई शख्स उत्तरीपुरा में रहते तक नहीं हैं। इंस्पेक्टर ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की।

कानपुर से आई रिपोर्ट और नाका पुलिस की रिपोर्ट में विरोधाभास होने पर कोर्ट ने फिर से जांच के आदेश दिए। इस बार नाका थाना के सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह को भेजा गया।

सब इंस्पेक्टर ने भी बिल्हौर इंस्पेक्टर और तहसीलदार को उनके साइन व मुहर वाले कागजात दिखाए। दोनों ने साइन व मुहर फर्जी होने की पुष्टि कर दी। कोर्ट ने विकास की रिहाई पर रोक लगाते हुए जमानतदारों सहित फर्जीवाड़े की कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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