एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपी नसीम व उसके साथियों से जब पूछा गया कि क्या वे नहीं जानते थे कि मिलावटी खून से निर्दोष व लाचार लोगों की जान चली जाएगी, तो इनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई। जब यह पूछा गया कि अगर उनके परिवार के किसी सदस्य को ब्लड की जरूरत पड़ती तब क्या करते तो उन्होंने कहा कि वे बाहर से खून लेने के बजाय अपना ही खून देते हैं।
महानगर कोतवाली में हुआ मुकदमा
एसटीएफ ने इन अभियुक्तों के खिलाफ महानगर कोतवाली में आईपीसी की धारा 420/467/468/471/272/273/34 के तहत अभियोग दर्ज कराया है। डीजीपी ओपी सिंह ने एसटीएफ की इस कामयाबी की सराहना की है। उन्होंने एसटीएफ के डीएसपी अमित कुमार नागर एवं उनकी टीम को डीजी कमेंडेशन डिस्क प्रदान करने की घोषणा की है।
एसटीएफ को मिली सूचना पर फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स) लखनऊ डिवीजन पीके मोदी ने अपनी मंडल स्तरीय टीम के साथ बीएनके ब्लड बैंक एवं मेडिसिन ब्लड बैंक पर पड़ताल की। पीके मोदी ने बताया कि जांच में पाई गई अनियमितताओं पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 का धारा 22 (1) (डी) के तहत दोनों ब्लड बैंकों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
एसटीएफ के राडार पर कई और ब्लड बैंक
पड़ताल में सामने आई जानकारी के आधार पर एसटीएफ के राडार पर राजधानी के कई और ब्लड बैंक हैं। एसटीएफ के एसएसपी ने बताया कि इनमें से कुछ ब्लड बैंकों के कुछ कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इनसे क्रमवार पूछताछ की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस गोरखधंधे की जड़े काफी गहरी मिल रही हैं। धंधे से जुड़े लोगों ने मिलावटी खून बेच कर लाखों के वारे-न्यारे किए हैं। सभी को चिह्नित करने की कवायद चल रही है।