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सैकड़ों यूनिट मिलावटी खून बेचकर करीब एक हजार की जान खतरे में डाली, कई की मौत की आशंका

Sat, 27 Oct 2018 05:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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गिरफ्तार किए गए आरोपी। - फोटो : amar ujala
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मिलावटी खून के धंधे में शामिल लोगों से हुई पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर इसकी वजह से अब तक दर्जनों की मौत होने का अंदेशा है। आरोपियों ने अभी एक मरीज की मौत होने की एसटीएफ को जानकारी दी है। एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह ने कहा कि इस सूचना की पुष्टि की जा रही है, क्योंकि आरोपी इस प्रकरण से संबंधित अस्पताल के बारे में पुख्ता सूचना नहीं दे पा रहा है।

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एसएसपी ने कहा कि चूंकि जो खून बेचा जा रहा था, उसमें ज्यादातर के संक्रमित होने का अंदेशा है। ऐसे में जिन मरीजों को ऐसा खून चढ़ाया गया होगा उनके स्वास्थ्य का क्या हुआ होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह गिरोह पिछले कई महीनों में सैकड़ों यूनिट मिलावटी खून बेच चुका है। किसी भी यूनिट में यह जांच नहीं हुई कि जिसका खून लिया गया वह किसी बीमारी या संक्रमण से ग्रसित तो नहीं है। सेलाइन वाटर मिलाने से खून का वास्तविक स्वरूप भी बदल जाता है।

एसएसपी ने कहा कि ऐसे में इस तरह के खून में स्वत: जमने की क्षमता नहीं रह जाती है जो किसी भी मरीज का लिए जानलेवा साबित होगा। लोगों को पता भी नहीं चल सका होगा कि उनके मरीज की मौत क्यों हो गई। उन्होंने कहा कि इस बात का अंदेशा है कि मिलावटी खून के इस कारोबार में कई लोगों की जिंदगी समाप्त हुई होगी। उन्होंने कहा कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह जानने की कोशिश की जाएगी कि उन्होंने किस-किस को किस अस्पताल में मिलावटी खून बेचा है।

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आरोपियों के चेहरे पर शिकन तक नहीं

एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि मुख्य आरोपी नसीम व उसके साथियों से जब पूछा गया कि क्या वे नहीं जानते थे कि मिलावटी खून से निर्दोष व लाचार लोगों की जान चली जाएगी, तो इनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आई। जब यह पूछा गया कि अगर उनके परिवार के किसी सदस्य को ब्लड की जरूरत पड़ती तब क्या करते तो उन्होंने कहा कि वे बाहर से खून लेने के बजाय अपना ही खून देते हैं। 

महानगर कोतवाली में हुआ मुकदमा 
एसटीएफ ने इन अभियुक्तों के खिलाफ महानगर कोतवाली में आईपीसी की धारा 420/467/468/471/272/273/34 के तहत अभियोग दर्ज कराया है। डीजीपी ओपी सिंह ने एसटीएफ की इस कामयाबी की सराहना की है। उन्होंने एसटीएफ के डीएसपी अमित कुमार नागर एवं उनकी टीम को डीजी कमेंडेशन डिस्क प्रदान करने की घोषणा की है।
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दोनों ब्लड बैंक के संचालन पर लगाई रोक

एसटीएफ  को मिली सूचना पर फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स) लखनऊ डिवीजन पीके मोदी ने अपनी मंडल स्तरीय टीम के साथ बीएनके ब्लड बैंक एवं मेडिसिन ब्लड बैंक पर पड़ताल की। पीके मोदी ने बताया कि जांच में पाई गई अनियमितताओं पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 का धारा 22 (1) (डी) के तहत दोनों ब्लड बैंकों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

एसटीएफ के राडार पर कई और ब्लड बैंक
पड़ताल में सामने आई जानकारी के आधार पर एसटीएफ के राडार पर राजधानी के कई और ब्लड बैंक हैं। एसटीएफ के एसएसपी ने बताया कि इनमें से कुछ ब्लड बैंकों के कुछ कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं। इनसे क्रमवार पूछताछ की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस गोरखधंधे की जड़े काफी गहरी मिल रही हैं। धंधे से जुड़े लोगों ने मिलावटी खून बेच कर लाखों के वारे-न्यारे किए हैं। सभी को चिह्नित करने की कवायद चल रही है।
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